सार
मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक मुरैना के वन क्षेत्र में घायल मिला, जिसे रेस्क्यू कर कूनो नेशनल पार्क लाया गया है। चोट की वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जबकि वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने रेडियो कॉलर वाले वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के तहत वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मादा चीता निर्वा का 19 महीने का एक नर शावक मुरैना के क्षेत्रीय वन मंडल के जंगल में घायल अवस्था में मिला। निगरानी दल ने रविवार की शाम उसे देखा। इसके बाद रात में रेस्क्यू कर कूनो नेशनल पार्क लाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। वन विभाग के अनुसार, शावक को लगी चोटों के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह किन परिस्थितियों में घायल हुआ। वहीं, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने शिकारियों की आशंका जताते हुए कूनो प्रबंधन और वन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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रात में किया गया रेस्क्यू, इलाज जारी
कूनो नेशनल पार्क की ओर से सोमवार को जानकारी दी गई कि निर्वा का 19 महीने का नर शावक मुरैना क्षेत्र के वन क्षेत्र में विचरण कर रहा था। 25 अक्टूबर की शाम निगरानी दल को वह घायल मिला। रात में उसे रेस्क्यू कर कूनो लाया गया और चिकित्सकीय जांच के बाद इलाज शुरू किया गया। वन विभाग के मुताबिक, चोट लगने की वजह का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। अभी किसी हमले या शिकार की आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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रेडियो कॉलर वाले वन्यजीवों की सुरक्षा पर अजय दुबे ने उठाए सवाल
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सोशल मीडिया पर रेडियो कॉलर वाले चीते के घायल मिलने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वह पहले भी कूनो और आसपास के इलाकों में रेडियो कॉलर लगे तेंदुओं के शिकार की आशंका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दुबे ने इस मामले में कूनो प्रबंधन और वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, चीते के घायल होने के पीछे शिकारियों का हाथ होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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10 तेंदुओं की खालें मिलने का मामला भी चर्चा में
कूनो और चंबल क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश में 10 तेंदुओं के कथित शिकार से जुड़े मामले में तेंदुओं की खालें जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय खालों के निशानों का भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के डेटाबेस से मिलान कराने की बात कही गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मारे गए तेंदुओं में रेडियो कॉलर वाले तेंदुए भी शामिल थे या नहीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जब्त खालों में रेडियो कॉलर वाले तेंदुओं के अवशेष थे या नहीं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगा चोट का कारण
वन विभाग के अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि शावक के घायल होने की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर चोट के कारण की पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शावक किसी वन्यजीव के साथ संघर्ष में घायल हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।