भोपाल के छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की थाली में क्या परोसा जा रहा है और उनकी शिकायतें सुनने वाला कौन है? राजधानी में सामने आए तीन मामलों ने इन सवालों को गंभीर बना दिया है। श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बच्चे भोजन करने के बाद अस्पताल पहुंच गए। विद्यार्थियों ने खाने में छिपकली मिलने की बात बताई, वहीं पहले भी भोजन में गड़बड़ी की शिकायतें किए जाने का दावा किया। दूसरी ओर, अनुसूचित जनजाति की छात्राओं ने दाल में कीड़े मिलने और शिकायत करने पर खुद खाना बनाने के लिए कहे जाने के आरोप लगाते हुए छात्रावास के सामने प्रदर्शन किया। मैनिट में भी भोजन के बाद विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया।
अस्पताल में भर्ती बच्चों ने बताई खाने की परेशानी
मुगालिया छाप-नीलबड़ स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बालक छात्रावास में भोजन के बाद 13 बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जेपी अस्पताल में भर्ती राजगढ़ निवासी छात्र ईशांत भानेरिया ने बताया कि खाना खाने के बाद उसके पेट में जलन शुरू हुई। पहले उसने इसे सामान्य परेशानी समझा, लेकिन धीरे-धीरे पेट दर्द बढ़ने लगा और सिर में भी दर्द होने लगा। ईशांत के मुताबिक, बाद में सभी बच्चों को बाहर बैठाया गया। जिन विद्यार्थियों ने खाना खाया था, उनमें से बीमार बच्चों को अलग किया गया। उसने बताया कि बाद में जानकारी मिली कि खाने में बड़ी छिपकली गिरी हुई थी। उसके अनुसार, दूसरे विद्यार्थियों ने छिपकली देखी थी और उसका फोटो भी होने की बात कही गई। तबीयत बिगड़ने पर उसे एंबुलेंस और कार से अस्पताल लाया गया।
दाल में दाल नहीं, पहले भी मिली कील और चींटी
टीकमगढ़ निवासी छात्र रमाकांत यादव ने छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उसने बताया कि दाल में दाल नहीं रहती और कभी-कभी सब्जी इतनी पतली होती है कि उसे ठीक से सब्जी भी नहीं कहा जा सकता। रमाकांत ने बताया कि भोजन में छिपकली मिलने की घटना के बाद बच्चों को पेट में जलन और उल्टी की परेशानी हुई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने दावा किया कि खाने को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। एक बार रसगुल्ले में छोटी कील और दूध में चींटी मिलने की शिकायत भी की गई थी। बच्चों के इन बयानों के बाद सवाल उठता है कि यदि भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायतों के बाद मेस की व्यवस्था की जांच की गई थी? फिलहाल, भोजन में छिपकली मिलने के दावे और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारण की पुष्टि जांच से होनी है।
कन्या छात्रावास में छात्राओं का प्रदर्शन
पंचशील नगर स्थित शासकीय कन्या महाविद्यालय के छात्रावास में अनुसूचित जनजाति की छात्राओं ने सोमवार को भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रदर्शन किया। छात्राओं का आरोप है कि दाल में बहुत सारे कीड़े मिलते हैं। शिकायत करने और दूसरा खाना मांगने पर उन्हें खुद जाकर खाना बनाने के लिए कहा जाता है। छात्राओं ने बताया कि मेस में खाद्य सामग्री ठीक से नहीं रखी जाती और भोजन तय मेन्यू के अनुसार नहीं मिलता। भिंडी, छोले जैसी सब्जियों में आलू मिलाकर परोसने का आरोप भी लगाया। छात्राओं ने मेस कर्मचारियों और सफाईकर्मियों पर बदसलूकी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत करने पर अपमानजनक बातें कही जाती हैं। छात्राओं का दावा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी के निरीक्षण से पहले राशन और दूसरी खाद्य सामग्री बदल दी जाती है। उनके मुताबिक, शिकायत के बाद कुछ सामान बदलता है, लेकिन अधिकारी के जाने के बाद स्थिति फिर वैसी हो जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया या बाहरी लोगों के आने पर उन्हें ऊपर रोक दिया जाता है और मुख्य गेट बंद कर दिया जाता है। छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, वे प्रदर्शन जारी रखेंगी। इन आरोपों पर छात्रावास प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है।
मैनिट में भी भोजन के बाद बिगड़ी थी विद्यार्थियों की तबीयत
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के हॉस्टल नंबर-10 में भोजन के बाद करीब 40 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने का मामला भी सामने आया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मेस का निरीक्षण कर सात खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। इनमें उड़द दाल, मूंगफली दाना, मोटी सेवई, चना दाल, छोला, चावल और अरहर दाल शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान मेस में खाद्य कारोबार का लाइसेंस, कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, कीट नियंत्रण कार्यक्रम और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट से ही भोजन की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के बीमार होने की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
यह भी पढ़ें-बच्चों के भोजन में छिपकली मिलने के बाद एक्शन में खाद्य सुरक्षा टीम, श्रमोदय विद्यालय की रसोई खंगाली
सवाल सिर्फ खाने का नहीं, शिकायतों पर कार्रवाई का भी
तीनों मामलों में बच्चों और विद्यार्थियों की परेशानी अलग-अलग है, लेकिन सवाल एक है छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है? श्रमोदय के छात्र पहले भी खाने में गड़बड़ी की शिकायतों का दावा कर रहे हैं, कन्या छात्रावास की छात्राएं लगातार कीड़े मिलने की बात कह रही हैं और मैनिट में निरीक्षण के दौरान जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। अब जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच कब हुई, पहले की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और रसोई व खाद्य सामग्री के भंडारण की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी। खाद्य नमूनों की रिपोर्ट, बच्चों की चिकित्सा जांच और संबंधित संस्थानों की पड़ताल के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। बच्चों के अस्पताल पहुंचने और छात्राओं के सड़क पर उतरने के बाद ही कार्रवाई की नौबत क्यों आई? जब तक शिकायतों के निपटारे, नियमित निरीक्षण और जिम्मेदारों की जवाबदेही का रिकॉर्ड सामने नहीं आएगा, तब तक छात्रावासों में सुरक्षित भोजन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अधूरा रहेगा।