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Letter Politics: दिग्विजय सिंह ने लिखा सीएम शिवराज को पत्र, किसानों के साथ न्याय करने की मांग

Fri, 22 Jul 2022 10:02 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

सीएम शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने अनुरोध किया है कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनके पास बची शेष फसल समर्थन मूल्य पर एक सप्ताह की समय-सीमा में खरीदकर तत्काल भुगतान कराया जाए।
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shivraj singh chouhan- Digvijay Singh - फोटो : self
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने फिर एक बार सीएम शिवराज को पत्र लिखा है। इस बार पत्र में उन्होंने किसानों के साथ न्याय करने की मांग की है। 
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सीएम शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने अनुरोध किया है कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनके पास बची शेष फसल समर्थन मूल्य पर एक सप्ताह की समय-सीमा में खरीदकर तत्काल भुगतान कराया जाए तथा जिन लघु और मध्यम किसानों ने कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम कीमत पर मंडी में मूंग बेची है, उन्हें भावांतर योजना के तहत अंतर की राशि दी जाकर न्याय किया जाना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने पत्र में सीएम पर कई निशाने भी साधे हैं। उन्होंने यह तक कहा कि आपके प्रयास किसानों के जले पर नमक छिड़कने का प्रयास हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप भी लगाया कि किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं दिलाया जा रहा है। किसान परेशान हैं। बता दें कि दिग्विजय सिंह अक्सर पत्र लिखकर अपनी बात रखते आए हैं। 
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पढ़िए दिग्विजय का पत्र

प्रिय श्री शिवराज सिंह चौहान जी,

प्रदेश के लाखों मूंग उत्पादक किसानों के साथ आप हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़ा अन्याय करने जा रहे हैं। गर्मी की मूंग लगाने वाले किसानों से फसल आने के दो माह बाद अब मूंग खरीदने की कार्रवाई शुरू कर रहे हैं। यह किसानों के शोषण की इंंतहा है।

आप स्वतः को किसान पुत्र कहते है! पर क्या ये भी नही जानते है कि प्रदेश के किसानों ने मई और जून माह में ही मूंग की फसल निकाल कर ली थी और इन्हीं माहों में किसानों ने मंडी में और व्यापारियों को औने-पौने दाम में अपनी फसल बेच दी थी। किसान लगातार समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग करते रहे पर उनकी बात सुनने की जगह आप चुनावी राजनीति में लगे रहे। आप सीहोर जिले के निवासी और किसान हैं। मैं आपके जिले सीहोर सहित पड़ोसी जिले देवास जिले के मूंग उत्पादक किसानों द्वारा पांच से छः हजार रुपये मूल्य के बीच बेची गई थी। मूंग की फसल बेचे जाने की पर्चियां मुझे ‘‘युवा किसान नेता अर्जुन आर्य’’ ने भेजी है। जो पत्र के साथ संलग्न कर भेज रहा हूं।
 
कम से कम आपके बुदनी, नसरूल्लागंज के किसानों का तो ध्यान रखना था। जिन्होंने एक से दो हजार रुपये प्रति क्विंटंल कम कीमत पर अपनी फसल मजबूरी में मंडी जाकर बेची थी। किस तरह कर्ज में डूबे किसानों को मजबूरी में मंडी जाकर अपनी फसल बेचनी पड़ी है। आपके कृषि मंत्री ने बिजली की समस्या से जूझते मूंग के किसानों के बारे में कहा था कि कटौती बंद किसानों को बिजली दे दो नहीं तो ये निपटा देंगे। उस समय गर्मी के मौसम में बिजली कटौती चरम पर थी और किसान रात-रात जागकर मूंग में पानी देने के लिए परेशान था। 

जैसे-तैसे किसानों की फसल आयी तो आप समर्थन मूल्य पर खरीदी भूल गए। अब जब लघु और सीमांत किसान अपनी समस्त फसल बेच चुके हैं तब आप 20 जुलाई से समर्थन मूल्य पर पंजीयन का उपक्रम कर रहे हैं। आपका यह प्रयास किसानों के ‘‘जले पर नमक छिड़कने’’ जैसा लग रहा है। आप का कृषि विभाग यह भूल गया कि जब गत वर्ष 15 जून से मूंग की खरीदी प्रारंभ की थी तो इस वर्ष सवा माह की देरी क्यों की गई। जबकि हर वर्ष किसान 4 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा मूंग की पैदावार कर रहे हैं। हर साल ये रकबा बढ़ता जा रहा है। 

एक तरफ महंगे बीज और कीटनाशक खरीदने से मूंग की फसल की लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ किसानों को सरकार वाजिब दाम नहीं दिला पा रही है। किसान जानना चाह रहे हैं कि अब कहां गई आपकी भावांतर योजना जिन किसानों ने सस्ते में मूंग की फसल बेची है उनको सरकार की तरफ से अंतर की राशि दी जानी चाहिए।

मेरा आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनके पास बची शेष फसल समर्थन मूल्य पर एक सप्ताह की समय-सीमा में खरीदकर तत्काल भुगतान कराया जाए तथा जिन लघु और मध्यम किसानों ने कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम कीमत पर मंडी में मूंग बेची है, उन्हें भावांतर योजना के तहत अंतर की राशि दी जाकर न्याय किया जाना चाहिए। 
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सादर,
आपका                
(दिग्विजय सिंह)
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