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MP News: साइबर फ्रॉड पर उदासीनता, आधा दर्जन थाना प्रभारियों पर जुर्माना; अब दो लाइन की शिकायत पर भी होगी FIR

Thu, 14 May 2026 05:14 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल पुलिस ने साइबर अपराधों में देरी पर सख्ती दिखाते हुए जीरो एफआईआर समय पर दर्ज न करने पर छह थाना प्रभारियों पर जुर्माना लगाया। पिछले 24 घंटे में 19 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के पांच मामले दर्ज हुए। अब “पहले एफआईआर, बाद में जांच” की नीति लागू की गई है। 

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Cyber Crime - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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 साइबर अपराधों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भोपाल पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। साइबर फ्रॉड से जुड़ी जीरो एफआईआर समय पर दर्ज नहीं करने पर राजधानी के आधा दर्जन थाना प्रभारियों पर अर्थदंड लगाया गया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में निगरानी एजेंसी ने पाया कि कई थानों में साइबर शिकायतें एक सप्ताह तक लंबित पड़ी रहीं, जिसके बाद संबंधित निरीक्षकों पर 500 से 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। 

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तुरंत एफआईआर के निर्देश
दरअसल, राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन से मिलने वाली शिकायतों में अक्सर सीमित जानकारी होती है। पुलिस जब पीड़ितों से अतिरिक्त जानकारी लेने के लिए संपर्क करती है, तो कई फरियादी थाने पहुंचने में देरी करते हैं। इसी वजह से कार्रवाई अटक रही थी। अब अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत में भले ही केवल प्रारंभिक जानकारी हो, लेकिन तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।

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भोपाल में 24 घंटे में पांच केस दर्ज
भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार की इसी सख्ती के बाद बीते 24 घंटों में भोपाल पुलिस ने साइबर ठगी के पांच मामले दर्ज किए हैं, जिनमें कुल 19 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है। कोलार पुलिस के अनुसार सरिता बर्मन नामक महिला ने पुलिस को बताया कि साइबर जालसाजों ने उनसे 1 लाख 20 हजार रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दो साल बाद दर्ज हुई 4.23 लाख की शिकायत
कोलार बंजारी के सी-सेक्टर निवासी सोनाली साहू ने शिकायत दर्ज कराई कि अप्रैल 2024 में उनके साथ 4 लाख 23 हजार 450 रुपए की साइबर ठगी हुई थी। अब इस मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज किया है।

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बिजली काटने की धमकी देकर 10.77 लाख उड़ाए
सबसे बड़ा मामला 67 वर्षीय शिवचरण के साथ हुआ। उन्हें व्हाट्सएप पर बिजली कंपनी के नाम से मैसेज भेजा गया, जिसमें बिल अपडेट नहीं होने पर बिजली काटने की धमकी दी गई। आरोपी ने एक लिंक भेजकर यूनियन बैंक एप डाउनलोड करवाया। लिंक वास्तव में एपीके फाइल थी, जिसने मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लिया। जालसाजों ने ओटीपी अपडेट के नाम पर कई ट्रांजेक्शन करवाए और देखते ही देखते उनके खाते से 10 लाख 77 हजार रुपये निकाल लिए।

जांच के लिए बनी नई नीति
अधिकारियों का कहना है कि अब साइबर अपराधों में पहले एफआईआर, बाद में जांच की नीति अपनाई जा रही है, ताकि पीड़ितों को तुरंत कानूनी संरक्षण मिल सके और रकम ट्रैक करने में देरी न हो। हालांकि, कुछ थाना अधिकारी इसे औपचारिकता निभाने जैसा कदम मान रहे हैं, क्योंकि अधूरी जानकारी के बावजूद प्रकरण दर्ज करने का दबाव बढ़ गया है।

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