भोपाल के महत्वपूर्ण जलस्रोत केरवा डैम के कैचमेंट एरिया में भू-माफियाओं द्वारा नदी का अस्तित्व मिटाने का गंभीर आरोप लगा है। समसगढ़ और मित्तूखेड़ी के बीच पश्चिमी भोपाल बायपास के नजदीक नदी में कोपरा और मिट्टी डालकर रास्ता बनाने, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने और प्राकृतिक जलप्रवाह रोकने की शिकायत की गई है। आरोप है कि जमीनों की कीमत बढ़ाने और अवैध प्लॉटिंग को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नदी को ही पाट दिया गया। नदी किनारे लगे हरे-भरे पेड़ों को जेसीबी से उखाड़ने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता राशिद नूर खान ने कलेक्टर, एसडीएम हुजूर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
नदी के बीच कोपरा डालकर बना दिया रास्ता
शिकायत के मुताबिक, ग्राम मित्तूखेड़ी के खसरा नंबर 104 और 105 तक पहुंचने के लिए सरकारी जमीन खसरा नंबर 112 का इस्तेमाल किया गया। नदी और सरकारी जमीन के बीच कोपरा डालकर रास्ता तैयार करने का आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन जमीनों तक पहुंचने का पुराना रास्ता दूसरी तरफ से था और यहां वर्षों से खेती हो रही थी। लेकिन पश्चिमी भोपाल बायपास के नजदीक जमीनों को मुख्य मार्ग से जोड़ने और प्लॉटिंग को फायदा पहुंचाने के लिए नदी में भराव कर नया रास्ता बना दिया गया। इससे नदी का प्राकृतिक जलप्रवाह भी बाधित हुआ है।
जमीनों की कीमत बढ़ाने के लिए नदी पर अतिक्रमण का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बायपास के नजदीक जमीनों को मुख्य सड़क से जुड़ा दिखाकर महंगे दामों पर बेचने के लिए यह पूरा खेल किया जा रहा है। नदी किनारे लगे हरे-भरे पेड़ों को जेसीबी से उखाड़ने और रातोंरात निर्माण गतिविधियां करने की बात भी कही गई है। शिकायतकर्ता ने रशीद खां और उनके बेटों पर इन गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
1.85 हेक्टेयर जमीन के सौदे का भी उल्लेख
शिकायत में अधिवक्ता मुकेश द्विवेदी के माध्यम से 12 मई 2026 को जारी जाहिर सूचना का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, विक्रेता रशीद खां और खरीदार रोहित राजौरिया के बीच ग्राम मित्तूखेड़ी के खसरा नंबर 104 (0.11 हेक्टेयर) और 105 (1.74 हेक्टेयर), कुल 1.85 हेक्टेयर जमीन के क्रय-विक्रय का अनुबंध हुआ है। शिकायतकर्ता ने इस सौदे और नदी में किए जा रहे कथित भराव के बीच संबंधों की जांच की मांग की है।
पंचायत के पत्र पर भी सवाल
ग्राम पंचायत समसगढ़ के पत्र क्रमांक 484/2026, दिनांक 20 मई 2026 को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। इसमें खसरा नंबर 101, 103, 112 और 144/111 सहित सरकारी रास्तों और खाली भूमि का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीमांकन और रास्ते के नाम पर ऐसी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे नदी पार करने वाले कथित अवैध रास्तों को फायदा मिल सकता है।
एनजीटी के आदेश के बावजूद नदी में भराव का आरोप
शिकायतकर्ता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश ओए नंबर 49/2025 (सीजेड), दिनांक 4 फरवरी 2026 का हवाला दिया है। उनका कहना है कि केरवा डैम के कैचमेंट एरिया में कोपरा डंपिंग, अतिक्रमण और एफटीएल सीमा के उल्लंघन को लेकर एनजीटी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। शिकायत में 33 मीटर बफर जोन और वेटलैंड संरक्षण के नियमों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में समसगढ़ और मित्तूखेड़ी क्षेत्र में नदी को पाटकर रास्ता बनाने की गतिविधियां पर्यावरणीय निर्देशों के उल्लंघन का मामला हो सकती हैं।
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कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे क्षेत्र का राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सीमांकन और मौके पर जांच कराने की मांग की है। खसरा नंबर 112 की सरकारी जमीन, नदी के वास्तविक बहाव क्षेत्र और एफटीएल सीमा की पहचान कराकर अवैध भराव हटाने की मांग की गई है। साथ ही नदी का प्राकृतिक जलप्रवाह बहाल करने, पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई करने और पुराने नक्शे में दर्ज नहीं होने वाले कथित अवैध रास्तों को हटाने की मांग भी की गई है।