को खां, मधपरदेश में इन दिनो पंचायत चुनावों का फाइनल राउंड चल रिया हे। बिना पार्टी चुनाव निशान के हुए इन चुनावों में जीत के दावे इतने दिलचस्प हें के लोग नतीजों से ज्यादा इस दावों के मजे ले रिए हें। हो तो यहां तक रिया हे तमाम सियासी पार्टियां उत्ती सीटें जीतने का दावा कर रई हें के जित्ती कुल सीटे ईं नई हेंगी। इन चुनावो में तगड़ा झटका उन बड़े नेताओं को ओर मंतरियों को भी लगा हे, जो अपने नाते-रिश्तेदारों को छोटी पंचायतों के जरिए बड़ी पंचायतों यानी लोकसभा ओर विधानसभा में घुसाने की जुगाड़ में लगे थे। मगर पब्लिक हेगी के सब भांप लेती हे।
मियां, अभी पिरदेश में जनपद पंचायतों के चुनाव नतीजे आ रिए हें। सूबे में कुल 313 जनपद पंचायतें हें जिनके 6 हजार 771 मेम्बरों के लिए चुनाव में वोटरों ने वोट डाले थे। मेम्बरों का चुनाव तो हो गया, अब जनपद पे किस पार्टी का कब्जा हुआ, इसका ऐलान हो रिया हे। इसको लेके दोनो बड़ी पार्टियां अपने अपने दावे कर रई हें। भारतीय जनता पार्टी का दावा हे के उसने 226 जनपदों पे कब्जा करा हे तो कांग्रेस के रई हे के उसका 176 पे कब्जा हो गया हेगा। दोनो को मिला लें तो कुल जनपदों की तादाद 402 होती हे। जबकि कुल जनपद पंचायतें 313 ही हें, जिनपे चुनाव हुए। हकीकत में किस पार्टी का कोन जीता, यह पता लगाना टेढ़ी खीर हे, क्योंकि चुनाव तो पार्टी के सिम्बल पर हुआ ई नई हे। यानी कोई किसी के भी अखाड़े में लंगोट घुमा रिया हे।
जीत की दावेदारी के इस जंगी मुकाबले में ताजातरीन बयान सीएम शिवराजसिंह चौहान का हे के हमने यानी भाजपा ने 226 जनपदों पे जीत का परचम लहराया तो कांग्रेस के हिस्से में महज 64 पंचायतें आईं। 22 जनपदें अन्य के खाते में गईं। कांग्रेस, भाजपा के दावों को झूठा बता रई हे। उसका केना हे के हम ज्यादा जनपद जीते हें। उसने तो भाजपा पे ये आरोप भी जड़ा हे के वो हमारे आदमियों को धमकियां दे रई हे। बीजेपी के कांग्रेस के जनपद मेंम्बरों के घरों पर सादे कपड़ों में सीआईडी बिठा दी हे। कुछ को तो जान से मारने की धमकी तक दी गई हे। वो किसी भी तरह से जनपद पे कब्जा करना चाहते हें। उधर बीजेपी का केना हे के हार से परेशान कांग्रेसी अंड-बंड इल्जाम लगा रिए हें।
खां, दोनो पार्टियों में असल मुसीबत उन नेताओं को मंतरियों की हे, जिनका इस चुनाव में परफार्मेंस का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रिया हे। इसी से अगले विधानसभा चुनाव के टिकट भी ते होंगे। लिहाजा लोकल लेवल के इन चुनावों में मंतरी तक ढोल-नगाड़ो पे नाच रिए हें। अंदरखाने खबर तो ये हे कई मंतरियो ओर बड़े नेताओं के नाते रिश्तेदार इन चुनावों में निपट गए हें। इसका मतलब ये निकाला जा रिया हे के नेताजी का इलाके में असर खत्म हे। जो रिश्तेदारों को नई जिता सके, वो खुद अगला चुनाव क्या जीतेंगे। ये रिपोर्ट पार्टी में आला कमान तक पोंच गई हे। हालांकि कुछ नेता अपने नाते रिश्तेदारों को जिताने में कामयाब भी रहे हें। इनकी तादाद भोत कम हे।
अभी तो पिरदेश में जिला पंचायतों के चुनाव कम्पलीट होने हे। असल तस्वीर उसी के बाद साफ होगी। मगर जोड़तोड़ का हर हथकंडा इन चुनावों में भी आजमाया जा रिया हे। माल बांटने से लेके नाल काटने तलक। खां, अगर इससे सत्ता का सेमीफाइनल माने तो कोई भी पार्टी के लिए अगले विधानसभा चुनाव की राह आसान नई हेगी। बीजेपी की परेशानी ये हे के कांग्रेस तमाम तिकड़मो के बाद भी मुकाबले में बनी हुई हे तो कांग्रेस की दिक्कत ये हे इतने झटकों के बाद भी वो उत्ती दमदारी से खड़ी नई हो पा रई हे के जिससे अगले विधानसभा चुनाव में दमदार जीत का दावा कर सके। अभी भी चुनावी जीत उसके लिए किस्मत का खेल ज्यादा हे और किस्मत के खेल तो निराले ई रेते हें खां।
- बतोलेबाज
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