को खां, अपने एमपी में गजब नजारा हे। सीएम शिवराज फुल फारम में नजर आ रिए हें। पब्लिक को लग रिया हे के शिवराज मामा ने पूरे पिरशासन को तान दिया हेगा। मगर हकीकत ये हेगी के हर छोटे छोटे कामों के लिए भी सीएम शिवराज को कोई बड़ा एक्शन लेना पड़ रिया हे। राजधानी भोपाल की खराब सड़के सुधरवाने से लेके सतना में एक विदेशी को लूटने वाले लुटेरों को पकड़वाने तक। यानी सरकारी निजाम तभी हरकत में आता हे, जब शिवराज का डंडा घूमता हे।
मियां, हालात बड़े अजीब हें। कुछ लोग इसे सीएम इन-एक्शन बता रिए हें तो कुछ लोग पिरशासन का ‘इनेक्टिव’ होना समझ रिए हें। आलम ये हे कि सरकारी सिस्टम में हरकत पेदा करने वास्ते 18 साल से मुखमंतरी रिए शिवराज को नए सिरे से मेहनत करनी पड़ रई हे। कई बार तो वो पब्लिक के मंच से ई फेसले कर रिए हें तो सुबह माॅर्निग वाक के टेम पर अफसरों को तलब कर इमर्जेंसी मीटिंगे कर रिए हेंगे। जिसने हीला हवाला करा, उसकी कुर्सी 24 घंटे में छिन गई। सरकारी हाकिमों को अल्टीमेटम तो आम बात हो गई हे।
ताजा दो मामले एसे हुए के पब्लिक भी भेरा गई हे के खां जे हो क्या रिया हे। पिरदेश की राजधानी भोपाल की सड़कें खराब हे, ये हर आदमी को पता हे। हाल में एक पिरेस फोटोगिराफर की मोत सड़के गड्ढे में गिरने से हो गई। उसके बाद सीएम को खबर लगी के उनकी नाक के नीचे ई सड़कों का ये हाल हे। लिहाजा सीएम के एक दिन अल सुबह नगर निगम अोर पीडब्लूडी के आला अफसरों की मीटिंग तलब की। सीएम को खुद याद नई होगा कि चार बरस पेले उन्होंने एमपी की सड़को को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन की सड़कों से बेहतर बताया था। तब अमरीका वाले भी चोंक गए थे। सड़कों की तारीफ करते नहीं थकते थे। उसके बाद शायद वो सड़क पे पेदल नई चले। वरना ये केने की जरूरत नई पड़ती के भोपाल की सड़कों की इतनी बदहाली की मेंने कल्पना नई करी थी। इसके बाद सीएम ने अफसरों को 15 दिनों में सड़कें सुधारने का अल्टीमेटम दे दिया। इसका असर अभी तो तक को ये हे के नगर निगम Aj पीडब्लूडी वाले एक दूसरे पे डामर उछाल रिए हें। सड़के कब सुधरेंगी, खुदा जाने।
तकरीबन ये ई आलम ला एंड आरडर का चल रिया हे। पिरदेश में बदमाश अब विदेशियों पे हाथ डालने से भी नई चूक रिए। सतना में एक पुर्तगाली शहरी को तीन बदमाशों ने लूट लिया। लोकल पुलिस ने हमेशा की तरह इसे भोत संजीदगी से नई लिया ओर लूट की रिपोट दर्ज करके अपने धंधे पानी में लग गए। जब अखबारों में खबर छपी तो सीएम ने पुलिस के आला अफसरों की किलास ले ली। इसके बाद पुलिस ने फुर्ती दिखाई ओर तीनो बदमाशों को दबोच लिया।
अब मियां सवाल ये हेगा कि सीएम के पास जमीनी हकीकत की खबरें पोंच रई हेंगी के नई। अगर नई पोंच रई तो इसके लिए कोन जिम्मेदार हेगा। कार्रवाई तो एसे लोगों के पे पेले होनी चाहिए, जो पिरदेश की गुलाबी तस्वीर सरकारी फाइलों में दिखा रिए हें। हकीकत में सरकार वो चला रिए हें, जो खाली माल कमाने या कुर्सी तोड़ने के मकसद से ओहदों पे डटे हुए हें। मुखमंतरी की परेशानी ये हे के अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हें ओर अगर सरकारी निजाम की काहिली का ये ई आलम रिया तो चुनाव केसे जीत पाएंगे। सवाल ये भी हेगा के सीएम के एक्टिव होने का ये मेसेज भी जा रिया के पिरदेश में उनके अलावा कोई कुछ नई कर रिया। जेसा चल रिया हे, वेसा चल रिया हे। पन्ना जिले के कलेक्टर को ये खबर नई थी के जियो टेगिंग का खतम हुआ के नई। उज्जेन में महाकाल लोक के उद्घाटन के पेले ई नगर निगम कमिश्नर को हटाना पड़ा। अफसरों में किसी का कोई खोफ भी हे, लग नई रिया।
- बतोलेबाज