मध्य प्रदेश के जबलपुर के कठौंदा गांव में पूरे शहर के आवारा कुत्ते छोड़े जा रहे हैं। इन श्वानों के कारण गांव के बच्चों की जान आफत में है। हद तो तब हो गई जब शुक्रवार को कुत्तों के एक झुंड ने डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची की जान ले ली।
घर के बाहर खेल रही थी मासूम
जबलपुर के मढोताल थाना क्षेत्र के कठौंदा गांव निवासी सुशील श्रीवास्तव की बेटी दीपाली के साथ यह घटना हुई। सुशील शुक्रवार को काम पर चले गए थे। पत्नी वर्षा श्रीवास्तव घर का काम कर रही थी और तीन साल का बेटा विवेक व बेटी दीपाली घर के बाहर खेल रहे थे। तभी कुत्तों का एक झुंड घूमता हुआ आया। बेटे ने उन्हें भगाने की कोशिश की तो कुत्ते उन पर लपक पड़े। विवेक तो भाग गया, लेकिन मासूम दीपाली उनके बीच फंस गई। कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया। उसे बुरी तरह काटा।
दो दिन इलाज के बाद तोड़ा दम
बेटी की चीख सुनकर मां बाहर आई, लेकिन तब तक वह लहूलुहान हो चुकी थी। पड़ोसियों की मदद से उसे मां अस्पताल लेकर गई। दो दिन तक उसका इलाज चला। शनिवार को ऑपरेशन भी हुआ, खून भी चढ़ाया गया, लेकिन दीपाली को नहीं बचाया जा सका।
इस वजह से हिंसक हो गए कुत्ते
बेटी की मौत से दुखी सुशील श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जबलपुर नगर निगम पूरे शहर के कुत्तों को लाकर कठौंदा में छोड़ रहा है। यहां मरे हुए पशुओं का चमड़ा उतारा जाता है। मृत जानवरों का मांस खाने के कारण यहां के कुत्ते ज्यादा हिंसक हो गए हैं।