दुनिया के तीसरे सबसे बड़े मजहबी समागम आलमी तबलीगी इज्तिमा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी में होने वाले इस आयोजन के लिए देश ही नहीं दुनिया के दूसरे मुल्कों में भी उत्साह है। अपने देश से उमराह सफर पर सऊदी अरब पहुंचे अकीदतमंद पराए मुल्क में भी इस मजहबी समागम में शरीक होने की दावत वहां मौजूद लोगों को दे रहे हैं।
आलमी तबलीगी इज्तिमा का आगाज इस माह की 29 तारीख को होगा। ईंटखेड़ी पर होने वाले इस आयोजन के इज़्तिमगाह पूरी तरह से तैयार हो गया है। यहां आने वाले लाखों जमातियों के ठहरने और बैठने के लिए पंडाल आकार ले चुका है। स्थाई और अस्थाई टॉयलेट के अलावा बड़ी तादाद में वजूखाने और खानपान के जोन यहां तैयार हैं। छोटे बड़े वाहनों की पार्किंग के लिए पार्किंग जोन भी यहां बना दिए गए हैं। टेलीफोन, फायर सेफ्टी, मेडिकल और अन्य जरूरत के पंडाल भी इस्तीमगाह का हिस्सा बन चुके हैं। इस्तीमगाह से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट तक आवाजाही सुगम बनाने का रोडमैप भी तैयार है। साथ ही इनकी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए वालेंटियर्स के जत्थों ने भी अपनी तैयारियों को पुख्ता कर लिया है। पुलिस प्रशासन भी लाखों लोगों के इस मजमे को सहेजने के लिए अपनी तैयारियों की रिहर्सल कर चुका है। जिला प्रशासन के साथ नगर निगम, पीएचई, पीडब्लूडी, बिजली विभाग समेत अन्य विभागों ने अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए खुद को झोंक दिया है।
पहुंचने लगीं जमातें
देश दुनिया से आने वाली जमातों ने तबलीगी जमात के भोपाल मरकज पर आमद देना शुरू कर दिया है। यहां से वे शहर की विभिन्न मस्जिदों का रुख कर रही हैं। जहां वे इज़्तिमा का मकसद और इससे होने वाले दीनी फायदे समझा रहे हैं।
मक्का-मदीना में भी इज्तिमा का चर्चा
भोपाल इज्तिमा की बातें सऊदी अरब में मौजूद लोगों के बीच भी हैं। उमराह सफर पर भोपाल, मप्र और अपने देश से पहुंचे लोग इसका खामोश प्रचार कर रहे हैं। भोपाल से उमराह सफर पर पहुंचे जाहिद मंसूरी और उनके परिजन के साथ मौजूद छोटे बच्चों में भी इसका उत्साह है।
बातें जमीं के नीचे और आसमान से ऊपर की
चार दिन के आलमी इज्तिमा के दौरान देश दुनिया से आने वाले उलेमा मजहबी तकरीरें करेंगे। इन तकरीरों में तबलीग के 6 बिंदुओं को खास तौर से बयान किया जाता है। कहा जाता है कि इन तकरीरों में सामाजिक, राजनीतिक या दुनियावी बातें नहीं की जाती। बल्कि इज़्तिमा तकरीरों में सिर्फ जमीन से नीचे या आसमान से ऊपर की ही बातें होती हैं।
1947 से निरंतर
दुनिया में सबसे बड़ा धार्मिक समागम हज को माना जाता है। जिसमें एक ही समय पर एक स्थान पर करीब 50 लाख लोग मौजूद होते हैं। इसके बाद बांग्लादेश के इज़्तिमा को रखा जाता है। इसी कड़ी में भोपाल इज्तिमा तीसरे नंबर पर माना जाता है। वर्ष 1947 में मस्जिद शकूर खान में महज 13 लोगों से हुई शुरुआत के बाद अब इस आयोजन में 10 लाख से ज्यादा जमाती शामिल होते हैं। बरसों ताजुल मसाजिद में होते रहे इस आयोजन को वर्ष 2005 से ईंटखेड़ी में जगह मिली और तबसे अब तक यह आयोजन इसी स्थान पर हो रहा है।
कुछ सामाजिक संदेश भी
- इज्तिमा के दौरान महंगी शादियों के रिवाज को रोकने सादगी के साथ निकाह किए जाते हैं। बिना किसी फिजूलखर्ची के होने वाले यह निकाह आयोजन के पहले दिन होंगे।
- वेस्ट खाने को उपयोग कर यहां खाद बनाई जा रही है।
- वॉटर ट्रीटमेंट की आधुनिक तकनीक यहां उपयोग की जा रही है।
- स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक और पॉलीथिन उपयोग पर पाबंदी। गीला और सूखा कचरा निष्पादन की तकनीक को आगे रखते हुए इस आयोजन ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाया है।
- नशा निरोधी इंतजाम के साथ इज्ज़िमगाह में सिगरेट, बीडी, तम्बाकू, पाउच पर पाबंदी।
- सामाजिक समरसता के संदेश के साथ सस्ते दरों पर वेज और नॉनवेज खाने के इंतजाम।
- ट्रैफिक कंट्रोल का नायाब तरीका, जिससे लाखों लोगों और हजारों छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही आसान होती है।