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स्लॉटर हाउस का काला सच: अफसरों की मेहरबानी और सिस्टम की छांव में कैसे पनपा असलम चमड़ा का साम्राज्य

Sat, 17 Jan 2026 06:30 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कभी मृत मवेशियों का चमड़ा और हड्डियां बेचने वाला असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा आज करोड़ों की संपत्तियों का मालिक कैसे बना और वर्षों तक नगर निगम की अनुमति व संरक्षण में उसका कारोबार कैसे फलता-फूलता रहा, जानें यहां
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असलम चमड़ा की असलियत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल में जिंसी के पास भोपाल नगर निगम की अनुमति और सहयोग से स्लॉटर हाउस संचालित करने वाले असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा आज कई करोड़ों का आसामी है। भोपाल में करीब 25 से 30 साल पहले असलम कुरैशी चमड़े का कारोबार करता था। यहीं से उसका नाम असलम चमड़ा पड़ा।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार असलम चमड़ा पर बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाकर स्लॉटर हाउस में कार्य कराने की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक की जा चुकी है लेकिन भोपाल पुलिस ने सवालों के घेरे में आए असलम चमड़ा के बयान के आधार पर उसे निर्दोष बताते हुए शिकायत की फाइल क्लोज कर दी। 

इतना ही नहीं उसने भोपाल नगर निगम के प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में चलाए जा रहे स्लॉटर हाउस में गायों का मांस को भैंस का मांस का बताने वाला सर्टिफिकेट भी नगर निगम के डॉक्टर से बनवा लिया था। इसी के आधार पर वह मुंबई और हैदराबाद से लेकर विदशों तक मांस की सप्लाई कर रहा था।
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अगर बजरंग दल द्वारा पकड़े गए कंटेनर के मांस की लैब में जांच नहीं कराई जाती तो असलियत सबके सामने नहीं आती। 8 जनवरी को सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में उक्त कंटेनर में गौमांस होने की पुष्टि हो गई है, जबकि भोपाल नगर निगम के डॉ. बेनीप्रसाद गौर द्वारा इसे भैंस का मांस होने का सर्टिफिकेट दिया गया था। इस खुलासे के बाद राजधानी में असलम चमड़ा को लेकर हर कोई  जानना चाहता है कि  भोपाल शहर, मध्यप्रदेश और देश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी गौहत्या कर उनके मांस की सप्लाई करने वाला असलम चमड़ा आखिर है कौन?

भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों से जुटाई गई जानकारी के अनुसार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा 25 से 30 साल पहले पुराने भोपाल में मृत मवेशियों को उठाकर उनके मांस से  चमड़े और हड्डियों को निकालकर बेचता था। समय बदला और भोपाल नगर निगम द्वारा मृत मवेशियों को उठाने के लिए कर्मचारी रख लिए गए लेकिन उनको उठाने और उसके बाद होने वाले खर्च को निकालने की व्यवस्था कहां से हो? ये एक बड़ा सवाल था। इसके लिए भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने असलम चमड़ा से अघोषित सौदा किया और मृत मवेशियों को उठाकर असलम को दिया जाने लगा।
 

स्लॉटर हाउस का सच - फोटो : अमर उजाला
असलम चमड़ा नाम कैसे पड़ा ?
चूंकि असलम कुरैशी वर्षों तक चमड़े का कार्य करता रहा, इसलिए उसका नाम असलम चमड़ा हो गया। नगर निगम के संपर्क में आने के बाद असलम मृत मवेशियों के चमड़े और हड्डियों के कारोबार को और फैलाता गया। बाद में डेयरियों और अन्य स्थानों पर मृत मवेशियों को उठाकर उसके चमड़े-हड्डी का कारोबार करने के लिए कई कर्मचारी भी रख लिए।

स्लॉटर हाउस का संचालन शुरू किया 
भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों ने बताया कि भोपाल नगर निगम द्वारा जब मैनुअली स्लॉटर हाउस का संचालन किया जा रहा था, तब भी असलम चमड़ा ही उसका ठेका लेता था। इसके बाद स्लॉटर हाउस से निकलने वाले वेस्ट को बेचकर वो कमाई करता था। आगे चलकर वह जिस भी दल की सरकार रहे, उस राजनीतिक दल के नेताओं और तत्कालीन अधिकारियों से सांठगांठ करने लगा और मांस की सप्लाई का ठेका भी लेने लगा था। 

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भोपाल वन विहार में वर्षों तक की सप्लाई 
भोपाल में स्थित वन विहार नेशनल पार्क में कई मांसाहारी जानवर हैं, जिसमें बाघ, शेर व अन्य जानवर शामिल हैं। मध्यप्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में घायल होने वाले जानवरों को यहीं लाकर इलाज किया जाता है। वन विहार में रहने वाले मांसाहारी जानवरों को खिलाए जाने वाले कच्चे मांस की सप्ताल भी असलम चमड़ा ही करता था। स्लॉटर हाउस में गायों को काटकर गौमांस सप्लाई का खुलासा होने के बाद वन विहार में उसका मीट सप्लाई का ठेका निरस्त कर दिया गया है।

अपनी गाड़ियों पर लिखा नगर निगम, भोपाल - फोटो : अमर उजाला
जिंसी स्लॉटर हाउस का आधुनिकीकरण   
दस्तावेजों की पड़ताल और नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी जुटाने पर पता चला कि भोपाल में जब आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन किया जाने लगा तो इसके लिए महापौर परिषद ने शहर के अंदर स्लॉटर हाउस संचालन की अनुमति नहीं दी। इसके बाद आदमपुर छावनी के पास स्लॉटर हाउस लगाने के लिए उत्तरप्रदेश की एक बड़ी मीट कंपनी ने प्रस्ताव दिया, लेकिन आदमपुर छावनी और आसपास के गांव के लोगों ने विरोध किया तो मामला ठंडा पड़ गया। इसके बाद जिंसी स्थित पुराने स्लॉटर हाउस के स्थान पर ही आधुनिक स्लॉटर हाउस को संचालित करने की तिकड़म भी अधिकारियों ने निकाल ली और वर्ष 2022 में नगर निगम के आयुक्त और प्रशासक रहे अधिकारियों ने असलम चमड़ा को आधुनिक स्लॉटर हाउस संचालन का ठेका भी दे दिया।

अधिकारियों की मेहरबानी
नगर निगम सूत्रों की मानें तो असलम चमड़ा निगम के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से सांठगांठ कर अपने हिसाब से स्लॉटर हाउस का संचालन करता था। वह नगर निगम द्वारा पशुओं की मेडिकल जांच और मांस को सर्टिफाइड करने के लिए पदस्थ किए गए पशु चिकित्सक और कर्मचारियों से अपने हिसाब से कार्य कराता था। सूत्रों की मानें तो स्लॉटर हाउस में पदस्थ डॉ. बेनीप्रसाद गौर मीट के ब्लैंक सर्टिफिकेट और कटने से पहले पशुओं के होने वाले चिकित्सकीय परीक्षण की खाली रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर असलम चमड़ा को दे देते थे और वह अपने हिसाब से मीट और मवेशियों की स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट भरता रहता था।

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स्लॉटर हाउस का सच - फोटो : अमर उजाला
तीन दर्जन संपत्तियां और आलीशान बंगले बनाए
असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा ने भोपाल नगर निगम के साथ मिलकर जब से मांस और चमड़े का कारोबार शुरू किया, तब से अब तक वह भोपाल शहर और आसपास करीब तीन दर्जन संपत्तियां बना चुका है। वह भोपाल के सेंट्रल जेल रोड स्थित पॉश कॉलोनी में करोड़ों की आलीशान कोठी में परिवार के साथ रहता है। उसके सट्टेबाजी और जुआ खेलने के लिए मुंबई और दुबई जाने के दावे भी सामने आए हैं। तीन साल पहले भी असलम पर भोपाल की जीवदया गौशाला के पास बड़ी संख्या में मृत गायों को फेंकने का आरोप लगा था।



कैसे हुआ खुलासा? 
-भोपाल में पुलिस मुख्यालय के सामने बीते वर्ष 17-18 दिसंबर की रात एक एसी कंटेनर को बजरंग दल और हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने पकड़ा।
-इन कंटेनरों में भोपाल स्लॉटर हाउस से निकला 26 टन मांस  पैकेटों  में था। सैंपल जब्त करके इन्हें लैब भेजा गया।
-आठ जनवरी को मथुरा की लैब रिपोर्ट में गौमांस की पुष्टि हुई। इसके बाद भोपाल में हंगामा मच गया।
-शासकीय स्लॉटर हाउस में गौवंश काटे जाने पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षद निगम अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
-नगर निगम की बैठक के बाद स्लॉटर हाउस को स्थाई रूप से सील करने के साथ वहां पदस्थ डॉ. बेनीप्रसाद गौर और आठ अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
गौकशी और एनएसए का प्रकरण दर्ज किया जाए: चंद्रशेखर तिवारी
भोपाल हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि अब रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो चुका है कि स्लॉटर हाउस में गायों को काटा जा रहा है। उसका संचालक गौकशी में शामिल है। ऐसे में सरकार असलम चमड़ा पर गौकशी और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार करे। इतना ही नहीं उस पर रोहिंग्या लोगों को अवैध रूप से बसाने और स्लॉटर हाउस में कार्य कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं, मध्यप्रदेश सरकार उसकी भी पुलिस से जांच कराकर कार्रवाई करे।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा - फोटो : अमर उजाला
नेताओं-अधिकारियों का हो नारको टेस्ट: अमित शर्मा
शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर स्लॉटर हाउस की मंजूरी देने वाले नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि असलम चमड़ा और भोपाल महापौर का नारको टेस्ट किया जाए। साथ ही अनुमति जारी करने वाले तत्कालीन नगर निगम आयुक्त, सहायक यंत्री उदित गर्ग व अन्य अधिकारियों का भी नारको टेस्ट कर सभी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए सौंपे ज्ञापन में पीले चावल लगाकर कार्रवाई का अनुरोध किया है।
 
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला
भाजपा का गौ-प्रेम केवल भाषणों में, सख्त कार्रवाई हो: जीतू पटवारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार में गौ माता काटी जा रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा का गौ प्रेम केवल भाषणों तक में सीमित है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जीरो प्रतिशत जीएसटी करके गौ मांस व्यापार को बढ़ावा दे रही है। 

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कहती है कि यहां गौवध नहीं होता, अगर गौवध नहीं होता तो टैक्स लगाने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि भोपाल स्लॉटर हाउस में कई टन गौमांस के अवशेष मिले हैं, यह जानकारी सरकार छिपा रही है। सभी जिम्मेदार अधिकारियों-नेताओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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