भोपाल शहर की झीलों और जलस्रोतों के आसपास अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अब प्रशासन की जवाबदेही तय कर दी है। 29 जुलाई को हुई सुनवाई में अधिकरण ने भोज वेटलैंड, कलियासोत डैम, केरवा डैम और भोपाल तालाब से जुड़े मामलों में साफ निर्देश दिए कि 50 मीटर एफटीएल दायरे में मौजूद सभी अवैध कब्जों और निर्माणों पर कार्रवाई की जाए। इतना ही नहीं, संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और जिला प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी भी तय की गई है।
सात गांवों में मिला कब्जों का बड़ा जाल
प्रशासन के सर्वे में प्रेमपुरा, धरमपुरी, सेवनिया गोंड, गौरा, बिशनखेड़ी, बीलखेड़ा और कोटरा सुल्तानाबाद में 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र के भीतर कुल 117 अतिक्रमण मिले। इनमें 68 कब्जे सरकारी जमीन पर और 49 निजी भूमि पर पाए गए। प्रशासन के अनुसार इनमें से 45 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 72 पर अभी कार्रवाई बाकी है।
प्रेमपुरा में 35 कब्जे, 23 हटाए
ग्राम प्रेमपुरा के खसरा नंबर 131 में 35 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। इनमें से 23 को हटाकर करीब एक एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई जा चुकी है। बाकी 12 आवासीय कब्जों को हटाने से पहले प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की प्रक्रिया चल रही है।
एनजीटी को चिंता- कार्रवाई के बाद भी बढ़ रहे नए कब्जे
सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से यह मुद्दा उठाया गया कि प्रशासन कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन संवेदनशील जल क्षेत्रों में नए अतिक्रमण भी सामने आ रहे हैं। इससे पुराने आदेशों के प्रभावी पालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बिंदु को देखते हुए एनजीटी ने अब सिर्फ कब्जे हटाने के बजाय उनकी पूरी सूची तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस बल के लिए भी तय की व्यवस्था
अधिकरण ने निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए समिति में पुलिस आयुक्त या एसएसपी की ओर से नामित पुलिस अधिकारी को शामिल किया जाए। इससे कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जा सकेगा और कानून-व्यवस्था की वजह से अभियान रुकने की स्थिति कम होगी।
प्रशासन ने सुनवाई में बताया कि कुछ मामलों में पुलिस बल की कमी और उच्च न्यायालयों के अंतरिम आदेशों के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है।
झीलों की सीमा होगी वैज्ञानिक तरीके से तय
एनजीटी ने केरवा और कलियासोत डैम के साथ भोपाल तालाब की वैज्ञानिक सीमा तय करने और उसका स्पष्ट सीमांकन कराने पर भी जोर दिया है। वेटलैंड के आसपास खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की जरूरत भी सामने रखी गई, ताकि जलस्रोतों में प्रदूषित पानी का खतरा कम किया जा सके। करीब 150 हेक्टेयर में प्रस्तावित वनस्पति उद्यान क्षेत्र के सीमांकन और संरक्षण का मुद्दा भी सुनवाई में आया।
मड रैली और वाहन दौड़ पर भी सख्ती
वेटलैंड क्षेत्र में अवैध मड रैली और वाहन रेसिंग के मामलों को भी गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों ने अधिकरण को बताया कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और इन्हें रोकने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है।
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31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई
एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन प्रतिवेदन शपथपत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी। अब मामला सिर्फ कब्जे हटाने का नहीं रहा है। 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र की पहचान से लेकर अवैध निर्माण हटाने तक प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होने से भोपाल की झीलों पर कार्रवाई की निगरानी सीधे न्यायाधिकरण के स्तर पर होगी।