राजधानी में ई-बस सेवा का दायरा अब मंडीदीप तक पहुंच गया है। शुक्रवार से बैरागढ़ से मंडीदीप के बीच चौथे रूट बी-38 पर 10 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया। इसके साथ शहर में चल रही ई-बसों की संख्या 40 हो गई है। 21 सितंबर से इस रूट पर पांच और बसें शुरू होने के बाद कुल 15 बसें दौड़ेंगी। इससे होशंगाबाद रोड और मंडीदीप क्षेत्र की करीब 300 कॉलोनियों को शहर के प्रमुख हिस्सों से सीधी कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। नए रूट से एमपी नगर, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, न्यू मार्केट और बैरागढ़ रेलवे स्टेशन तक पहुंच आसान होगी। नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों के साथ रोजाना शहर आने-जाने वाले यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। नए रूट से करीब पांच हजार यात्रियों के जुड़ने का अनुमान है।
33.6 किलोमीटर लंबा है बी-38 रूट
बी-38 रूट की शुरुआत बैरागढ़ ई-बस डिपो से होगी। बसें बोर्ड ऑफिस चौराहा और मेट्रो स्टेशन होते हुए एचईजी मंडीदीप तक जाएंगी। करीब 33.6 किलोमीटर के इस मार्ग में रानी कमलापति स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-5, डीआरएम मेट्रो स्टेशन, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, बागसेवनिया पुलिस स्टेशन, आशिमा मॉल, आरकेडीएफ, मिसरोद, 11 मील, इंडस टाउन, चिनार ड्रीम सिटी, आयशर-सतलापुर जोड़ और एचईजी मंडीदीप जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। अब तक एमपी नगर और आईएसबीटी तक बस सेवा उपलब्ध थी, लेकिन इसके आगे मंडीदीप की ओर सीधी बस कनेक्टिविटी नहीं थी।
रोजाना 10 हजार यात्री कर रहे सफर
भोपाल में वर्तमान ई-बस सेवा से रोजाना औसतन करीब 10 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। बी-38 पर 15 बसें पूरी क्षमता से चलने के बाद करीब पांच हजार अतिरिक्त यात्रियों को सुविधा मिलने का अनुमान है। रूट पर न्यूनतम किराया 6 से 7 रुपये और अधिकतम किराया 40 रुपये तक रहेगा।
चार रूट पर पहुंची ई-बस सेवा
भोपाल में पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत 30 जुलाई को 10 बसों से हुई थी। इसके बाद 18 अगस्त को 10 और बसें जोड़ी गईं। फिर 10 बसों के शामिल होने से संख्या 30 पहुंची और अब बी-38 पर 10 बसें शुरू होने के बाद कुल संख्या 40 हो गई है। अभी बी-35 चिरायु अस्पताल-बैरागढ़ से आकृति इकोसिटी सलैया, बी-36 कोच फैक्ट्री रेलवे स्टेशन से बैरागढ़ चिचली-कोलार और बी-37 बैरागढ़ से नादरा, वल्लभ भवन, बोर्ड ऑफिस और आईएसबीटी के बीच चल रही हैं। बी-38 इन रूटों को मंडीदीप की ओर आगे बढ़ाता है।
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दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक दरवाजा
ई-बसों में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। बस में हाइड्रोलिक दरवाजा दिया गया है, जिससे व्हीलचेयर और ट्राइसिकल के साथ चढ़ना-उतरना आसान होता है। दरवाजे के सामने दो व्हीलचेयर या ट्राइसिकल खड़े करने लायक जगह भी रखी गई है।
छोटी बस, इसलिए तंग सड़कों पर संचालन आसान
ई-बस की लंबाई करीब 9 मीटर और चौड़ाई लगभग साढ़े तीन मीटर है। इसके मुकाबले मौजूदा सिटी बसों की लंबाई 12 मीटर तक है। कम लंबाई की वजह से ई-बसों को शहर की अपेक्षाकृत संकरी सड़कों और व्यस्त हिस्सों में चलाना आसान होगा। हालांकि, कुछ मार्गों पर भारी यातायात के दौरान इन बसों को भी जाम का सामना करना पड़ सकता है।
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हर बस में छह सीसीटीवी कैमरे
सुरक्षा के लिए प्रत्येक ई-बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनकी निगरानी डिपो में बने नियंत्रण कक्ष से की जा रही है। बस में यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए दो दरवाजे हैं, जिन्हें खोलने और बंद करने का नियंत्रण चालक के पास रहता है।