मध्यप्रदेश में भी ब्लैक फंगस के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही दवा की भी किल्लत बढ़ रही है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को फंगस रोधी दवा एंफोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं। बीते दस दिनों से यही हालात हैं।
उपयुक्त दवा नहीं मिलने के कारण डॉक्टर मरीजों को विकल्प के तौर पर फ्लुकोनाॅजोल की गोलियां दे रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि फ्लुकोनाॅजोल की गोली भी फंगस बढ़ने से रोकती है, लेकिन एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन की तुलना में गोली का असर कम होता है।
साल में एक दो मरीज मिलते थे
ब्लैक फंगस के मरीज आम दिनों में साल में एक दो मिलते थे, लेकिन कोरोना महामारी के बाद इनकी संख्या अचानक बढ़ गई है। चूंकि पहले यह संक्रमण कम होता था, इसलिए दवाई भी कम बनती थी। अब अचानक देशभर में यह रोग बड़े पैमाने पर फैलने लगा है, इसलिए दवाइयां भी कम पड़ने लगी है।
मुंबई व इंदौर से मंगा रहे इंजेक्शन
हमीदिया में भर्ती मरीजों को भोपाल में दवा नहीं मिलने से वे मुंबई व इंदौर से एंफोटेरिसिन बी के इंजेक्शन मंगा रहे हैं। ब्लैक फंगस के मरीज को एक दिन में इस इंजेक्शन के पांच वाॅयल लगते हैं। यह दवा मरीज को दो से तीन सप्ताह तक दी जाती है।