मानसून की शुरुआत के साथ भोपाल नगर निगम ने जर्जर भवनों को लेकर एक बार फिर नोटिस जारी कर दिए हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी खानापूर्ति तक सीमित है। शहर में 3,435 जर्जर भवन हैं, जिनमें 757 अति जर्जर हैं। शहर के कई इलाकों में हजारों परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं, जबकि हर साल नोटिस जारी करने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
राजधानी में मानसून की दस्तक के साथ ही नगर निगम एक बार फिर जर्जर भवनों को लेकर सक्रिय हो गया है। हर साल की तरह इस बार भी भवन मालिकों और सरकारी विभागों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फिर वही खानापूर्ति नजर आ रही है। शहर के हजारों परिवार आज भी ऐसे मकानों में रह रहे हैं, जो कभी भी बड़ा हादसा बन सकते हैं। नगर निगम के सर्वे के मुताबिक भोपाल में 3,435 भवन जर्जर हैं। इनमें 2,464 सरकारी और 971 निजी भवन शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 740 सरकारी और 17 निजी भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं। इसके बावजूद हर साल की तरह इस बार भी निगम ने केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। इस वर्ष 2,184 भवन मालिकों और सरकारी एजेंसियों को मरम्मत या खतरनाक हिस्से हटाने के नोटिस दिए गए हैं।
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फाइलों में कैद ऐशबाग के 600 फ्लैट
नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी है। यहां के 600 फ्लैट वर्ष 2016 में ही जर्जर घोषित कर दिए गए थे। वर्ष 2018 में निगम ने रहवासियों को मकान खाली करने के नोटिस थमाए, लेकिन उसके बाद मामला फाइलों से बाहर नहीं निकल सका। हर साल हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम एक-दूसरे को पत्र लिखकर जिम्मेदारी निभाने का दावा करते हैं। रहवासियों से यह लिखवा लिया जाता है कि यदि कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी। आठ साल बाद भी न मकान खाली कराए गए, न ही जर्जर भवनों को तोड़ा गया।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
शहर के कई हिस्सों में जर्जर भवन लोगों की जान पर खतरा बने हुए हैं। ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में सबसे अधिक 327 जर्जर भवन हैं। ऐशबाग जनता क्वार्टर के 600 मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। वहीं अरेरा कॉलोनी, जवाहर चौक, धोबी घाट, इब्राहिमपुरा, गुर्जरपुरा और काजीपुरा में भी वर्षों से नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। रिहायशी इलाकों के अलावा कई स्कूल, धर्मशालाएं, ट्रस्ट भवन और व्यावसायिक परिसर भी जर्जर हालत में हैं। बैरागढ़, शिवाजी नगर और रेलवे स्टेशन रोड जैसे व्यस्त बाजारों में भी कई दुकानें खतरनाक स्थिति में हैं, जहां रोज हजारों लोगों की आवाजाही रहती है।
दावे बड़े, कार्रवाई छोटी
नगर निगम का दावा है कि अब तक 35 जर्जर भवन हटाए गए, पांच अति जर्जर भवन खाली कराए गए और कुछ मकान मालिकों ने स्वयं मरम्मत कराई। लेकिन शहर में 3,435 जर्जर भवनों की तुलना में यह कार्रवाई बेहद सीमित है। निगमायुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि जर्जर मकानों को लेकर नोटिस भेजा गया है। जहां जरूरी होगा वहां कार्रवाई भी की जाएगी।