मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज व्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है। निजी अस्पताल संगठनों ने 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का ऐलान किया है। यानी तय समय तक समाधान नहीं हुआ तो निजी अस्पतालों में आयुष्मान के मरीजों का इलाज बंद हो सकता है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि एक तरफ पुराने क्लेम का भुगतान अटका है, दूसरी तरफ एनएबीएच प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। ऐसे में अस्पतालों पर आर्थिक और प्रक्रियागत दोनों तरह का दबाव बढ़ गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मध्य प्रदेश और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन समेत विभिन्न अस्पताल संगठनों ने सरकार को 8 अक्टूबर तक समाधान का समय दिया है। संगठनों का दावा है कि भोपाल के कई निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक भुगतान लंबित है।
739 अस्पतालों के सामने नई शर्त
आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर से एनएबीएच प्रमाणपत्र की शर्त लागू हो चुकी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में योजना से जुड़े 739 अस्पताल हैं। इनमें करीब 310 अस्पतालों के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र बताया गया है। सरकारी अस्पतालों को अलग करने पर करीब 300 निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता नई शर्त से प्रभावित होने की आशंका है। अस्पताल संगठनों की मांग है कि एनएबीएच को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन नियम अस्पताल के आकार, बिस्तरों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से व्यावहारिक होने चाहिए।
इलाज की मंजूरी के बाद भी क्लेम कटने पर सवाल
अस्पताल संचालकों का कहना है कि मरीज को भर्ती करने और उपचार शुरू करने से पहले बीमारी, उपचार और पैकेज के आधार पर प्री-ऑथराइजेशन लिया जाता है। इसके बाद अस्पताल अपने संसाधनों से मरीज का इलाज करता है। लेकिन उपचार पूरा होने के बाद तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से क्लेम रिजेक्ट या बड़ी राशि काट दिए जाने से अस्पतालों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है। आईएमए मध्य प्रदेश अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत के मुताबिक पुराने और वर्तमान पोर्टल पर भुगतान लंबित हैं। सीपीडी स्तर पर क्लेम अटके हैं और रिजेक्शन व कटौती की समस्या भी बनी हुई है। संगठनों का कहना है कि कई बार ज्ञापन और बैठकों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
अस्पतालों की मांग-भुगतान की भी तय हो समय-सीमा
यूपीएचडीए मध्य प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने कहा कि अस्पतालों के लंबित भुगतान और क्लेम से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समय-सीमा और जवाबदेही तय होनी चाहिए। अस्पतालों का कहना है कि यदि मरीज के इलाज की प्रक्रिया के लिए नियम और समय-सीमा तय है तो इलाज के बाद भुगतान के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा होनी चाहिए। अस्पताल संगठनों ने प्रत्येक क्लेम रिजेक्शन या कटौती का लिखित कारण बताने, योग्य चिकित्सकों से क्लेम की जांच कराने और प्रभावी अपील व्यवस्था बनाने की मांग की है। साथ ही पैकेज दरों को वास्तविक उपचार खर्च के अनुरूप संशोधित करने की मांग भी रखी गई है।
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8 अक्टूबर के बाद आंदोलन बढ़ाने की तैयारी
अस्पताल संगठनों ने स्पष्ट किया है कि 8 अक्टूबर से पहले सरकार के साथ सार्थक बातचीत नहीं हुई और समस्याओं का लिखित समाधान नहीं मिला तो आयुष्मान योजना का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू किया जाएगा।
यूपीएचडीए मध्य प्रदेश के चेयरमैन एडवाइजरी डॉ. जीशान अहमद ने कहा कि वास्तविक मरीज, बीमारी और उपचार होने के बावजूद केवल तकनीकी कारणों से वैध क्लेम रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान के लिए जरूरत पड़ी तो करीब एक हजार एम्बुलेंस के साथ दिल्ली जाकर संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखेंगे। अस्पताल संगठनों का कहना है कि वास्तविक धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई का वे समर्थन करते हैं, लेकिन वास्तविक मरीज के उपचार के बाद केवल प्रक्रियागत त्रुटि के आधार पर पूरा क्लेम रोकना उचित नहीं है। अब नजर सरकार और अस्पताल संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। 8 अक्टूबर तक समाधान नहीं हुआ तो आयुष्मान योजना के मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।