भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी को लेकर क्रेडाई भोपाल ने सरकार के सामने अपना रोडमैप रखा है। क्रेडाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शोध आधारित नीति-पत्र सौंपकर योजना के पहले पांच वर्षों के लिए परियोजना-वार बजट, जिम्मेदार विभाग, जमीन की व्यवस्था और सालाना कार्ययोजना तय करने का सुझाव दिया है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट से जमीन पर काम तक नीति-पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा है। संस्था ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के प्रकाशन का स्वागत करते हुए कहा कि अब अगली चुनौती योजना के प्रावधानों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की है।क्रेडाई के अनुसार मास्टर प्लान सिर्फ भूमि उपयोग और निर्माण नियमों का दस्तावेज नहीं होना चाहिए। इसमें यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्तावित सड़क कब बनेगी, जमीन कैसे उपलब्ध होगी, पानी और सीवर की व्यवस्था कौन करेगा, सार्वजनिक परिवहन कैसे विकसित होगा और परियोजनाओं के लिए बजट कहां से आएगा।
100 दिन में पुराने रिकॉर्ड का मिलान
नीति-पत्र में पुरानी सड़कों, आरक्षित जमीन, सेवाओं और अलग-अलग विभागों के अभिलेखों के मिलान के लिए 100 दिन का प्रशासनिक कार्यक्रम बनाने का सुझाव दिया गया है। क्रेडाई ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम नागरिकों की वैधानिक आपत्तियों और सुनवाई की प्रक्रिया का विकल्प नहीं होगा। शोध में भोपाल के पुराने योजना अभिलेख, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की टिप्पणियां, मध्यप्रदेश के पांच शहरों और अन्य प्रमुख शहरों के नियोजन दस्तावेजों का अध्ययन किया गया है। इसमें सरकार के विचार के लिए 10 नीति विकल्प, ड्राफ्ट की समीक्षा के लिए 15 सवाल और विभिन्न शहरों के अध्ययन से निकले 50 तुलनात्मक सिद्धांत शामिल किए गए हैं।
रिंग रोड से लॉजिस्टिक्स तक फोकस
नीति-पत्र में आउटर और इनर रिंग रोड की अलग-अलग भूमिका तय करने पर जोर दिया गया है। दक्षिणी औद्योगिक क्षेत्र से विमानतल तक तेज संपर्क, उत्तर में विमानतल से जुड़ा बड़ा कार्गो हब और दक्षिण में रेल-राजमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है। भौंरी में शिक्षा-नॉलेज-एआई सिटी, भेल की संभावित अतिरिक्त जमीन, आवास, कौशल विकास और बिजली-पानी जैसी जरूरतों को भी अलग-अलग अधिकार और स्वीकृति प्रक्रिया के साथ देखने की बात कही गई है।
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झील, पहाड़ और जल निकासी भी योजना का हिस्सा
क्रेडाई ने भोपाल की झीलों, जलग्रहण क्षेत्रों, प्राकृतिक जल निकासी, पहाड़ियों और विरासत क्षेत्रों को विकास की बुनियाद में शामिल करने की जरूरत बताई है। साथ ही पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और उपचारोत्तर देखभाल के अवसरों के अलावा वरिष्ठ नागरिकों, किरायेदारों, छोटे कारोबारियों, श्रमिकों और कम आय वाले परिवारों की जरूरतों को भी योजना में स्थान देने का सुझाव दिया है। विभागीय जानकारी के मुताबिक भोपाल विकास योजना 2047 का ड्राफ्ट 1,016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र, 254 गांवों और करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 51 किलोमीटर के ग्रोथ कॉरिडोर, शिक्षा-नॉलेज-एआई सिटी, विमानतल और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के संपर्क तथा डिजिटल ट्विन आधारित निगरानी की परिकल्पना की गई है। क्रेडाई ने कहा कि ड्राफ्ट का स्वागत उसके हर प्रावधान की बिना परीक्षण स्वीकृति नहीं है। अब दस्तावेज, मानचित्र और विकास नियमों का अध्ययन कर नागरिक हित में प्रमाण आधारित सुझाव तैयार करने की जरूरत है।