केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर किसानों और आदिवासियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उमंग सिंघार ने दावा किया कि केंद्र ने परियोजना की अनियमितताओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है, जबकि अरुण यादव ने आंदोलनकारियों को हटाने की कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या बताया।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर छतरपुर में चल रहे आंदोलन पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भाजपा सरकार पर किसानों, आदिवासियों और दलितों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने परियोजना में मुआवजा, विस्थापन और कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा है।
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केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण और विस्थापन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार ने भी मध्यप्रदेश सरकार से जवाब-तलब किया है, जिससे प्रभावित लोगों के आंदोलन को पहली बड़ी सफलता मिली है।
किसानों-आदिवासियों की लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता
सिंघार ने कहा कि उन्होंने स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों, आदिवासियों और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी। उनका आरोप है कि परियोजना में पारदर्शिता की कमी है और मुआवजा वितरण में कथित गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रभावित परिवार को न्याय, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए।
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प्रधानमंत्री ने भी सक्रिय होने के निर्देश दिए
सिंघार ने दावा किया कि उनकी पहल के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और केंद्र ने राज्य सरकार से लंबित मामलों पर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि छतरपुर और पन्ना के प्रभावित इलाकों में भारी विरोध के बाद सरकार को सक्रिय होना पड़ा।
अरुण यादव बोले- लोकतंत्र की हत्या
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि उचित मुआवजा और अधिकारों की मांग कर रहे लोगों को जबरन हटाना लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता क्यों अपना रही है। क्या अपने अधिकारों की मांग करना अपराध हो गया है? कांग्रेस ने कहा है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिलेगा, तब तक पार्टी का संघर्ष सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा।