मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने तीन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर हमला बोला और घेराव की चेतावनी दी, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगाया। पहले ही दिन जिस तरह के तेवर दिखे, उससे साफ है कि इस बार बजट सत्र हंगामेदार रहने वाला है।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन सियासी पारा चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने नजर आए। विधानसभा सदस्य नहीं होने के बावजूद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले दिन विधानसभा पहुंचे और बाहर तीन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि तीन अपराधी मंत्री बजट सत्र में बैठने के हकदार नहीं हैं। यदि ये सदन में दिखाई दिए तो हम कड़ा विरोध करेंगे।
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24 फरवरी को करेंगे विधानसभा का घेराव
पटवारी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पहले ही आग्रह किया था कि संबंधित मंत्रियों को हटाया जाए। उनका आरोप था कि जिन पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को कमजोर बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश को उसका हक का पैसा केंद्र से नहीं मिल पा रहा और सरकार लगातार कर्ज लेने की तैयारी में है। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि इस्तीफे नहीं हुए तो 24 फरवरी को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट में सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर बात होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के कर्ज पर श्वेत पत्र लाने की मांग की और कहा कि पुराने बजट की घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन के अंतर को भी सदन में उठाया जाएगा।
महेश परमार का तीखा आरोप
तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कानून-व्यवस्था और हाल की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंदौर में दूषित पानी से मौतें हुईं, बच्चों की मौत के मामले सामने आए और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हुए। उनका आरोप था कि सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है और जब तक संबंधित मंत्रियों का इस्तीफा नहीं होगा, विरोध जारी रहेगा।