भाजपा किसान मोर्चा भिंड के जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव नियुक्ति निरस्त
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल-पेट्रोल की खपत कम करने की अपील के बावजूद निकाली गई वाहन रैली को संगठन ने अनुशासनहीनता माना। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रदेश भाजपा संगठन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिलाध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। संगठन का मानना है कि पार्टी की कार्यशैली और शीर्ष नेतृत्व के संदेश के विपरीत इस तरह की वाहन रैलियां गलत संदेश देती हैं और यह प्रधानमंत्री की अपील की अवहेलना है।
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बता दें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए अपने कारकेड में 13 वाहनों को घटकार 8 कर दिया है। बुधवार को सीएम के कारकेट में सिर्फ 6 वाहन थे। उन्होंने मंत्रियों और निगम मंडलों में हो रही नियुक्तियों के पदाधिकारियों को सालीन तरीके से पदभार ग्रहण करने और मंत्रियों को भी अपने काफिले में गाड़ियां कम करने की अपील की थी। इसके बाद पार्टी और सरकार दोनों स्तर पर सादगी और ईंधन बचत को लेकर संदेश दिया जा रहा है। ऐसे में बुधवार को किसान मोर्चा की ओर से निकाली गई बड़ी वाहन रैली संगठन के निशाने पर आ गई। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को बीजेपी संगठन की सख्त अनुशासनात्मक नीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालने वाले सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी, वित्तीय अधिकार निरस्त
सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालकर वायरल होने वाले मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें वाहन रैली आयोजित करने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इतना ही नहीं, उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स और डिजिटल सोशल मीडिया माध्यमों से यह जानकारी संज्ञान में आई कि अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करते समय 200 वाहनों की विशाल रैली निकाली गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे शासन के दिशा-निर्देशों के प्रतिकूल बताते हुए गंभीर अनुशासनहीनता माना है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की वाहन रैली न केवल राष्ट्रीय संसाधनों के अपव्यय को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए अपेक्षित सादगी, जवाबदेही और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के विपरीत भी है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले के अंतिम निराकरण तक सौभाग्य सिंह के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता
जारी आदेश के अनुसार सिंह अब मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के कार्यालय एवं परिसर में प्रवेश, निगम के वाहन, संसाधन एवं कर्मचारियों का उपयोग, निगम की बैठकों में भागीदारी अथवा अध्यक्षता, किसी भी प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय में सहभागिता तथा कर्मचारियों को निर्देश जारी करने जैसे अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक जीवन में सादगी, जवाबदेही और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा शासन की गरिमा के विरुद्ध किसी भी प्रकार के आचरण को गंभीरता से लिया जाएगा।