राजधानी की अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट में फुटपाथ पर अतिक्रमण का मामला अब थाने तक पहुंच गया है। रहवासियों ने सवाल उठाया है कि सरकारी पैसे से बनाया गया फुटपाथ आखिर गायब कैसे हो गया? उनका आरोप है कि मुख्य बाजार और आसपास की सड़कों के फुटपाथ पर धीरे-धीरे कब्जे होते गए, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने रहे। अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने हबीबगंज थाने में शिकायत देकर फुटपाथ पर हुए कथित कब्जों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
फुटपाथ खुद नहीं भागा, किसी ने भगाया है
रहवासियों ने अपनी शिकायत में कहा है कि फुटपाथ धीरे-धीरे पार्किंग, निजी उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों की चपेट में आ गया। इससे पैदल चलने वालों के लिए जगह कम होती गई और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विवेक त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि यदि किसी भूमाफिया, भवन मालिक या व्यावसायिक प्रतिष्ठान ने सरकारी फुटपाथ पर कब्जा किया है तो यह संभव कैसे हुआ? उनका कहना है कि सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वालों के साथ उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिनके जिम्मे सड़क और फुटपाथ की सुरक्षा थी।
अतिक्रमणकारी ही नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
शिकायत में केवल कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की गई है। रहवासियों ने नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की आपराधिक जांच कराने और दोष पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकारी जमीन पर लंबे समय तक कब्जा तभी संभव है, जब संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था विफल हो या किसी स्तर पर लापरवाही अथवा संरक्षण मिला हो। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुराने नक्शे और मौजूदा स्थिति की जांच की मांग
रहवासियों ने मांग की है कि अरेरा कॉलोनी और 10 नंबर मार्केट के पुराने नक्शे और सरकारी रिकॉर्ड निकाले जाएं। इसके बाद रिकॉर्ड में दर्ज फुटपाथ और मौके की वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाए। यदि सरकारी रिकॉर्ड में फुटपाथ दर्ज है और मौके पर उसकी जगह कब्जा पाया जाता है तो कब्जा करने वालों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय करने की मांग की गई है।
यह भी पढ़ें-भारी बारिश में स्कूलों के ई-अटेंडेंस से राहत, शिक्षकों को नदी-नाले पार कर स्कूल पहुंचने की जरूरत नहीं
अब जनता सड़क पर कहां चले?
रहवासियों का कहना है कि फुटपाथ आम लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन अतिक्रमण के कारण उनका उद्देश्य ही खत्म हो गया है। उनका सवाल है कि जब फुटपाथ ही नहीं बचेंगे तो पैदल चलने वाले लोग सड़क पर ही चलेंगे और इससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ेगा। विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने कहा कि यह सिर्फ फुटपाथ का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति को निजी कब्जे से बचाने का सवाल है। उन्होंने फुटपाथ से अतिक्रमण तत्काल हटाने, उसे मूल स्वरूप में बहाल करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने मामले में प्रशासन से फुटपाथ के रिकॉर्ड की जांच कर मौके की स्थिति से मिलान कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।