भोपाल के जेपी अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर पर गंभीर इल्जाम लगे हैं। यहां जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली प्रसूता और परिजनों के साथ डॉक्टर द्वारा बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रसूता के परिजनों का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार नवजात को अस्पताल के एक डॉक्टर ने स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) से निकालकर टेबल पर रख दिया और कहा, ‘लो बच्चा मर गया अब जी भर के इसे देख लो।’
बताया जा रहा है कि जब परिजनों ने डॉक्टर के इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई तो डॉक्टर ने उन्हें बच्चा चोरी के इल्जाम में हवालात में बंद कराने की धमकी दे डाली। दरअसल, भेल क्वार्टर बरखेड़ा निवासी 24 वर्षीय देवकी ने 19 जनवरी को जुड़वा बेटों को जन्म दिया था। बच्चों का वजन कम था। साथ ही इंफेक्शन होने के कारण उन्हें एसएनसीयू में रखा गया था।
परिजनों का एसएनसीयू में नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉ. सतीश मरावी पर आरोप है कि वो बच्चों को देखने नहीं दे रहे थे, जबकि कई बार वे डॉक्टरों से बच्चों को देखने के लिए भी कह चुके थे। हालांकि, डॉ. मरावी ने इन आरोपों को निराधार बताया है। देवकी के पति गोविंद महाले ने बताया कि सुबह 6.30 बजे अस्पताल से फोन आया और बताया कि बच्चे की हालत गंभीर है। मैं अस्पताल पहुंचा तो डॉ. मरावी मेरी मां और पत्नी से आपत्तिजनक लहजे में बात कर रहे थे। मैंने पूछना चाहा तो मुझ पर भी भड़क गए। इस बीच उन्होंने एक बच्चे को मशीन से निकालकर टेबल पर लाकर रख दिया और कहा बच्चा मर गया, लो अब जीभर कर देखो इसको।
देवकी की सास आशा ने भी डॉक्टर सतीश पर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वे रात में भी बच्चे को देखने गई थीं, तब डॉक्टर ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया। उन्होंने इस बात का विरोध किया तो डॉक्टर ने बुरी तरह से डांटना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया डॉक्टर ने उनसे कहा, ‘यहां से बाहर निकल जाओ नहीं तो बच्चा चोरी के इल्जाम में बंद करा देंगे।’ गोविंद ने बताया कि सुबह जब उसने डॉक्टर के दुर्व्यवहार का विरोध किया तो डॉ. मरावी ने उसे भी बच्चा चोरी के इल्जाम में बंद कराने की धमकी दी और पुलिस को बुला लिया था।