राजधानी भोपाल में टैक्सी यूनियन की हड़ताल अपनी 8 सूत्रीय मांगो को लेकर हड़ताल की। हालांकि हड़ताल का भोपाल में ज्यादा असर नहीं दिखा। जहां 2500 से ज्यादा टैक्सियां और 2000 से अधिक ऑटो की हड़ताल का दावा किया गया था। वहां केवल 400 के करीब लोग ही शामिल हुए। दोपहर बाद यूनियन के पदाधिकारी भी हड़ताल खत्म कर टैक्सी चलाने लगे। हालांकि सुबह से यात्रियों को टैक्सी नहीं मिल रही थी, उन्होंने ई-रिक्शा और कुछ ऑटो का सहारा लिया, लेकिन इन चालकों ने मौके का फायदा उठाते हुए दो गुना ज्यादा किराया वसूला।
केवल निजी एप आधारित संचालकों की हड़ताल
दरअसल रेलवे स्टेशनों पर अवैध वसूली जै मुद्दों को लेकर टैक्सी यूनियन कल्याण समिति के आह्वान पर ओला, ऊबर, रैपिडो जैसी निजी ऐप आधारित सेवाओं से जुड़ी 2500 से ज्यादा टैक्सियां और 2000 से अधिक ऑटो हड़ताल की घोषणा की गई थी।
100 की जगह 200 मांग रहे थे ऑटो
रीवा से आए रोहित सिंह ने बताया कि रेवांचल एक्सप्रेर से आज मै भोपाल सुबह पहुंचा। रेलवे स्टेशन से बाहर आने के बाद, ऑटो से बात किया तो उन्होंने जहां 100 किराया लगता है वहां 200 की मांग कर रहे थे। हालांकि बाद में 170 में वह मुझे मेरे गंतव्य स्थान पर पहुंचा दिया। बाद में किसी ने बताया कि आज ओला-उबर की हड़ताल है इसलिए ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। इसी प्रकार एक और सवारी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उन्हें रेलवे स्टेशन से न्यू मार्केट जाना था। ऑटो वाले डबल चार्ज मांग रहे थे। उन्होंने अपने पहचान वालों को बुलाकर घर चले गए।
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पुलिस प्रशासन से ली गई है अनुमति
यूनियन के राष्ट्रीय सचिव नफीसउद्दीन ने बताया कि हमारी परिवहन विभाग और ओला-ऊबर से नाराजगी है। हम परिवहन विभाग से कहना चाहते हैं कि वह इसमें हस्तक्षेप करें और हमारी बात सुने। जब ओला ऊपर शुरू हुआ था तब वह हमें इंसेंटिव देता था जो कि अब बंद हो गया है। इसके अलावा ओला ऊबर ने प्रतिदिन का 150 रुपए सब्सक्रिब्शन चार्ज जोड़ दिया है। यह विरोध प्रदर्शन राजधानी सहित प्रदेशभर के टैक्सी चालकों की उपेक्षा और शोषण के खिलाफ है। उन्होने दावा किया कि इस प्रदर्शन 70 लोग शामिल हुए।
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टैक्सी यूनियन की प्रमुख मांगें
1. भोपाल, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर जैसे रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी चालकों से जबरन 10 रुपए प्रति फेरे की राशि वसूली जा रही है, जबकि प्राइवेट वाहनों को वहां 15 मिनट तक फ्री पार्किंग की सुविधा मिल रही है। यह वसूली न तो किसी नियम के अंतर्गत है और न ही उसकी कोई रसीद दी जाती है। प्रतिदिन लगभग 2000 टैक्सियां इन स्टेशनों पर पहुंचती हैं, जिससे हर दिन 20,000 रुपए तक की अवैध वसूली हो रही है। इससे टैक्सी चालकों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।
2. एयरपोर्ट और अन्य पब्लिक पिकअप पॉइंट्स पर उचित पार्किंग सुविधा दी जाए,राजा भोज एयरपोर्ट पर ओला-उबर के वाहनों को तो पार्किंग की अनुमति है लेकिन परंपरागत टैक्सी चालकों के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। यूनियन का कहना है कि जब वाहन टैक्सी कोटे में रजिस्टर्ड होते हैं, तब से ही उन्हें एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे स्थानों पर समुचित पार्किंग की सुविधा मिलनी चाहिए।
3. टैक्सी यूनियन का आरोप है कि एयरपोर्ट पर प्राइवेट वाहन चालक ओला-उबर की बुकिंग को रद्द करवाकर सवारियों को लालच देकर बैठा लेते हैं। इससे न सिर्फ टैक्सी चालकों की आमदनी घट रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
4. ओला, उबर, रैपिडो जैसी कंपनियां निजी वाहनों को टैक्सी की तरह चला रही हैं। जिनके पास न फिटनेस है, न कमर्शियल परमिट और न बीमा। जबकि परंपरागत टैक्सी चालकों को हर साल फिटनेस, परमिट, कमर्शियल बीमा जैसे नियमों के तहत 50-60 हजार रुपए का खर्च करना पड़ता है। इससे उनके व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ रहा है।
5. यूनियन ने मांग की है कि ओला-उबर जैसी कंपनियों पर भी वही कलेक्टर दरें लागू की जाएं जो परंपरागत टैक्सी चालकों पर लागू होती हैं। वर्तमान में कंपनियां आपसी प्रतिस्पर्धा में मनमाने रेट तय करती हैं, जिससे चालकों को नुकसान होता है।
6. यूनियन ने बताया कि परिवहन विभाग की फिटनेस मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर रहीं। थोड़ी सी भी तकनीकी चूक पर वाहन फिटनेस से बाहर कर दिया जाता है, जिससे चालकों को आर्थिक नुकसान होता है।
7. टैक्सी वाहनों में लगाए जा रहे पैनिक बटन की कीमत बाजार में 4000 रुपए है लेकिन उससे 13,000 रुपए तक की वसूली की जा रही है। इसके अलावा अधिकतर मामलों में पैनिक बटन ठीक से काम भी नहीं कर रहा।
8. टैक्सी यूनियन ने मांग की है कि उसे तुलसी नगर, भोपाल में G टाइप या F टाइप का शासकीय आवास आवंटित किया जाए, ताकि संगठन का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके।