दस लाख की धोखाधड़ी के बाद कारोबारी ने लगाई फांसी
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राजधानी के गांधी नगर थाना क्षेत्र स्थित फाइन अपार्टमेंट में 28 सितंबर की दोपहर एक कारोबारी भूपेंद्र शर्मा (45) ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। आर्थिक तंगी, धोखाधड़ी और पारिवारिक उत्पीडऩ के भंवर में फंसे भूपेंद्र ने कदम उठाने से पहले एक मार्मिक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए लिखा सोनू, तुम हारना मत... मुझे माफ कर देना। परिजनों का आरोप है कि कैंटीन के काम के नाम पर 10 लाख रुपए हड़पने और ससुर द्वारा लगातार प्रताडि़त किए जाने से तंग आकर उन्होंने यह घातक कदम उठाया।
काम दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी
घटना के संबंध में मृतक के पुत्र दीप शर्मा ने बताया कि पिता का रोजगार छूट जाने के बाद उनकी पहचान अमर अदानी नामक व्यक्ति से हुई थी। अमर ने करीब 10 लाख रुपए में सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की कैंटीन का काम दिलाने का झांसा दिया लेकिन बाद में जब भूपेंद्र ने काम पक्का करने या पैसे लौटाने की बात की, तो अमर ने न केवल रुपए लौटाने से इनकार कर दिया, बल्कि 2 लाख रुपए अतिरिक्त मांगते हुए जान से मारने की धमकियां भी दीं।
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मृतक के परिजनों द्वारा पुलिस को सौंपे गए सुसाइड नोट में अमर अदानी के साथ-साथ भूपेंद्र के ससुर शिवनारायण शर्मा पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। भूपेंद्र ने लिखा कि उनके ससुर उनकी पत्नी का हक मारकर अहमदाबाद भाग गए और लगातार परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे।
कारोबारी ने सुसाइड नोट में क्या लिखा
अपने सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने अमर अदानी और ससुर के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की बात कही है। साथ ही अपनी पत्नी हिम्मत बनाए रखने और दोनों बेटों का ध्यान रखने की बात लिखी है।
सुसाइड नोट पर उपजा विरोधाभास
बेटे दीप शर्मा और परिवार का दावा है कि उन्होंने भूपेंद्र द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट पुलिस को सौंप दिया है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जबकि गांधी नगर थाने के एएसआई जेएस पाटिल के अनुसार घटनास्थल से सीधे तौर पर कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था, हालांकि परिजनों द्वारा सौंपे गए पत्र और उसमें लगाए गए आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।