यूपीएससी ने मंगलवार को सिविल सर्विस 2024 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसमें मध्यप्रदेश के रोमिल द्विवेदी को आल इंडिया में 27वीं रैंक मिली है। जबकि भोपाल के क्षितिज आदित्य शर्मा ने ऑल इंडिया 58वीं रैंक हासिल की है। क्षितिज आदित्य शर्मा ने अमर उजाला को अपनी सफलता का राज बताया। वहीं रोमिल द्विवेदी के पिता के के द्विवेदी ने उनकी सफलता का राज बताया है।
सरकारी सेवा में जाना ही नहीं चाहते थे रोमिल
रोमिल द्विवेदी के पिता के के द्विवेदी ने बताया कि रोमिल पढ़ाई लिखाई में शुरू से ही बहुत अच्छा रहा। रोमिल कभी सरकारी सेवा में जाना ही नहीं चाहते थे। लेकिन अचानक से उनका मन बदला और उन्होंने घर वालों को बिना बताए सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरु कर दी। पहला अटेम्प्ट साल 2022 में दिया था जिसमें वो मेन्स एक्जाम पास नहीं कर पाए, फिर उन्होंने दूसरी बार साल 2023 में एक्जाम दिया और इस बार उनको 188वीं रैंक मिली। जिससे उनका सलेक्शन इंडियन रेलवे सर्विसेस में हो गया। वर्तमान में वो उदयपुर स्थित रेलवे के ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे थे, लेकिन साल 2024 यूपीएससी के रिजल्ट में रोमिल को 27वीं रैंक मिली है। ऐसे में माना जा रहा है कि उनको आईएएस कैडर मिल जाएगा।
नहीं किया कोई कोचिंग
रोमिल द्विवेदी के पिता केके द्विवेदी ने बताया कि रोमिल ने किसी प्रकार की कोचिंग क्लासेस का सहारा नहीं लिया उन्होंने सेल्फ स्टडी किया। हम लोगों ने काफी प्रयास किया की कोचिंग ज्वाइन कर ले लेकिन उन्होंने जॉब में रहते हुए तैयारी की और सफलता हासिल की यहां तक की केवल परीक्षाओं में ही छुट्टी लिया। केके द्विवेदी ने बताया कि रोमिल बैकिंग सेक्टर में काम कर रहा था। कोरोना लाकडाउन के दौरान वह वर्क फ्राम होम कर रहा था। उस दौरान रोमिल में गांव में ही था, लेकिन फिर उसने यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी। पहले हमें बताया भी नहीं और इसके लिए कोई कोचिंग का सहारा भी नहीं लिया।
तैयारी के दौरान कई उतार चढ़ाव आए
क्षितिज शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि सिविल सर्विसेज की तैयारी के दौरान कई उतार चढ़ाव आए लेकिन हौसला बुलंद रखा और मन लगाकर पढ़ाई करते रहे। उन्होंने बताया कि यूपीएससी में तीसरा प्रयास था। वे अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक करने में सफल रहे थे लेकिन उनकी रैंक 384 होने के कारण उन्हें आईआरएस कैडर मिला था। क्षितिज का टारगेट प्रशासनिक अफसर के रूप में देश की सेवा करना था, लिहाज़ा उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया। यूपीएससी के तीसरे अटेंप्ट में उन्हें 58वीं रैंक आई और अब वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अफसर बनकर देशसेवा करेंगे। उन्होंने बताया कि सफलता में कई लोगों की अहम भूमिका है। मुख्य रूप से माता-पिता का विशेष सहयोग रहा।
पढ़ाई के लिए ट्रेनिंग से ली छुट्टी, सोशल मीडिया से बनाई दूरी
क्षितिज ने बताया कि यूपीएससी के तीसरे प्रयास की तैयारी के दौरान उन्होंने आईआरएस की ट्रेनिंग से छुट्टी ली थी। यूपीएससी में सफल होने के लिए क्षितिज ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी और वे अपने मोबाइल का उपयोग सिर्फ़ बात करने के लिए करते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं को भी वे यही सीख दे रहे हैं कि पढ़ाई के लिए सोशल मीडिया को कुछ समय के लिए जिंदगी से बाहर निकाल दें। उनका मानना है कि इससे एकाग्रता खत्म होती है और लक्ष्य में विघ्न आ सकता है।
कोचिंग के बजाय खुद पर रखा भरोसा
क्षितिज ने बताया कि अपनी तैयारी के दौरान कभी भी कोचिंग क्लासेस की मदद नहीं ली। उन्होंने कहा कि वे जान-बूझकर किसी कोचिंग में नहीं गए, क्योंकि उन्हें खुद पर ज़्यादा यकीन था। क्षितिज ने कहा कि यदि उन्हें उनके मूल राज्य मध्य प्रदेश में ही पोस्टिंग मिलती है, तो यह उनके लिए बेहतर होगा, क्योंकि वे भी एमपी में ही रहकर अपने गृह राज्य की सेवा करना चाहते हैं।