मध्यप्रदेश की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल द्वारा सत्र 2022–23 की एएनएम और जीएनएम प्रथम वर्ष की प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए घोषित परीक्षकों की सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं जो नर्सिंग कॉलेज घोटाले में पहले ही संदेह के घेरे में आ चुके हैं, और जिन पर जांच अभी भी लंबित है। इस निर्णय के विरोध में एनएसयूआई मध्यप्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अध्यक्ष को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने इन नियुक्तियों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इन नियुक्तियों को छात्रहित के साथ धोखा और पूरे परीक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर कुठाराघात बताया।
इन लोगों पर लगे आरोप
रवि परमार ने पत्र में उल्लेख किया कि नियुक्त किए गए परीक्षकों में प्रियदर्शिनी डेहरिया, राधिका नायर, राजश्री मालवीय, दीपिका कुंभारे, पूनम मुखर्जी, मेनका मालवीय ( जोकि वर्तमान में 65 दिन की चाइल्ड केयर लीव पर हैं ) के नाम शामिल हैं इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने ऐसे नर्सिंग कॉलेजों को पात्र (सूटेबल) बताकर मान्यता दिलवाई, जो वास्तव में अपात्र (अनसूटेबल) थे।
अधिकारी बोले करा रहें हैं जांच
परीक्षकों के नियुक्ति के मामले ने मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अध्यक्ष आईएएस मनोज कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली हैं। रजिस्ट्रार को जांच करने के लिए निर्देश दिया है। आरोप तो किसी पर भी लगाया जा सकता है।
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एनएसयूआई की ये प्रमुख मांगें
1. नर्सिंग घोटाले में संलिप्त एवं जांचाधीन व्यक्तियों को तत्काल परीक्षक पद से हटाया जाए।
2. ए.एन.एम. और जीएनएम प्रथम वर्ष (सत्र 2022–23) की परीक्षाओं में बेदाग छवि, योग्यता, और अनुभव रखने वाले शिक्षकों को ही परीक्षक के रूप में नियुक्त किया जाए।
3. परीक्षक चयन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट-आधारित बनाया जाए, जिसके लिए सार्वजनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
4. उक्त नियुक्तियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाहियां दोहराई न जाएं।
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छात्रों के भविष्य से किया जा रहा खिलवाड़
रवि परमार ने कहा है कि इस तरह की नियुक्तियां न केवल छात्रों के भविष्य के साथ धोखा हैं, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की गुणवत्ता और सेवा की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। नर्सिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। परमार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नर्सिंग काउंसिल इस विषय को गंभीरता से नहीं लेती और त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती, तो एनएसयूआई पूरे प्रदेश में चरणबद्ध जन आंदोलन और कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य होगी।