प्लांट के बाहर पुराने कपड़ों का लगा ढ़ेर
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी भोपाल में पुराने कपड़ों को रिसाइकल करने का प्लांट लगाया गया है। लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। दरअसल पुराने कपड़ों से कॉटन फाइबर बनाने का यह प्लांट बीएमसी ने अन्ना नगर ट्रांसफर स्टेशन में लगाया है। टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (टीआरएफसी) प्रोजेक्ट में एक महीने पहले ही मशीन लगा दी गई है। यह प्लांट पीपीपी मोड पर लगाया गया है। कंपनी के संचालक का कहना है कि बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया चल रही है। अगले एक माह में प्लांट शुरू कर दिया जाएगा। उन्होने बताया कि प्लांट के बाहर पुराने कपड़ों का ढेर लग गया है। जो बरसात में बार-बार भीग रहे हैं, जिसे सुखाने में परेशानी हो रही है।
प्रति दिन 1.5 टन कपड़े हो रहे एकत्रित
कंपनी के संचालक हैरी पवानी ने बताया कि अभी प्रतिदिन लगभग 1.5 टन कपड़े इस प्लांट में एकत्रित किए जा रहे हैं, जबकि भविष्य में इसकी क्षमता 10 टन प्रतिदिन तक पहुंचने की संभावना है। इन कपड़ों को प्रोसेस कर शुद्ध कॉटन तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग धागा, सॉफ्ट टॉय, तकिये और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने में किया जाएगा। उन्होने बताया कि नगर निगम भोपाल के इस सहयोग से न केवल वस्त्र अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान संभव होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं आर्थिक विकास तीनों को साथ लेकर चलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह भी पढ़ें-
एमपी कांग्रेस के 71 जिला अध्यक्षों का एलान, 18 दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को गुना की जिम्मेदारी
पीपीपी मोड पर प्लांट का संचालन
भोपाल नगर निगम ने अन्ना नगर गारबेज ट्रांसफर स्टेशन में टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (टीआरएफसी) प्रोजेक्ट लगाया है। इस प्रोजेक्ट का काम पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। कंपनी ही पूरे साल रेवेन्यू देगी। बीते अप्रैल में निगम ने इसे कंपनी के हेंडओवर किया है। कंपनी ने मशीनें भी लगा दी है। पुराने कपड़ों का कलेक्शन कर प्लांट में रखे जा रहे हैं। बिजली का कनेक्शन होते ही प्लांट शुरू हो जाएगा। संस्था द्वारा नगर निगम भोपाल को 21,000 प्रतिमाह का शुल्क अदा किया जाएगा।
यह भी पढ़ें-
राहुल गांधी के संगठन सृजन का भोपाल में विसर्जन', जिला अध्यक्षों का विरोध, नेता बोले- BJP वालों को दिए पद
1 करोड़ से लगा प्लांट
कंपनी के संचालक हैरी पवानी ने बताया कि इसमें पुराने कपड़ों को प्रोसेस कर कॉटन फाइबर बनाया जाता है। यह प्लांट 5 टन क्षमता का है। देशभर में कपड़ों की कतरन से कॉटन फाइबर बनाने के प्लांट लगे हैं। लेकिन इस प्लांट में ऐसे कपड़ों को रिसायकल किया जाता है, जो किसी काम के नहीं होते। अब तक ऐसे पुराने कपड़ों को आदमपुर कचरा खंती भेजा जाता रहा है। इस प्लांट की अनुमानित लागत 1 करोड़ रुपए है।