नर्सिंग काउंसिल का रात में खुला गेट
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल का फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा, जहां अभी तक फर्जी नर्सिंग कॉलेज को मान्यता देने की जांच चल रही है। जांच के लिए हाई कोर्ट ने तीन सदस्सीय कमेटी बनाई है। इस दौरान काउंसिल के अधिकारियों के कार्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल शुक्रवार को देर रात तक नर्सिंग काउंसिल खुली रही और कुछ अधिकारी काम करते नजर आए। अब सवाल खड़े हो रहें हैं कि देर रात ऐसा क्या काम किया जा रहा है। कहीं फर्जीवाड़े के सबूतों को मिटाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है। देर रात तक काउंसिल में चल रहे कामकाज के दौरान NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इसका कड़ा विरोध जताया उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने भ्रष्टाचार को छिपाने और नए खेल को अंजाम देने में जुटे हुए हैं।
काले कारनामों को अंजाम देने की कोशिश
परमार ने कहा है कि रात 11 बजे तक नर्सिंग काउंसिल में काम चल रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि काले कारनामों को अंजाम देने की कोशिश हो रही है। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरनाक है, बल्कि नर्सिंग के पेशे की गरिमा को भी ठेस पहुंचा रही है। रवि परमार ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। रवि परमार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस घोटाले पर रोक नहीं लगाई गई, तो NSUI राज्यव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होगी।
डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल
नर्सिंग काउंसिल में विवादित डेप्युटी रजिस्टार चंद्र प्रकाश शुक्ला की दोबारा नियुक्ति पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सवाल खड़े किए हैं उन्होंने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद चंद्रप्रकाश शुक्ला को दोबारा मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल का डिप्टी रजिस्ट्रार बनाना नर्सिंग शिक्षा में सुधार की बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।सरकार भ्रष्ट अधिकारियों पर इतनी मेहरबान क्यों है।
आखिर किसके दवाब में फिर से चंद्रप्रकाश शुक्ला को डिप्टी रजिस्ट्रार बनाया।