राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित आवासीय क्षेत्र अरेरा कॉलोनी में संचालित एक शराब दुकान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर सोमवार को स्थानीय निवासी विवेक त्रिपाठी ने कलेक्टर जनसुनवाई में विस्तार से शिकायत दर्ज कराई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। त्रिपाठी ने बताया कि वार्ड क्रमांक 45 के अंतर्गत आने वाला भूखंड E-4/21 पूरी तरह से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है। इस पर 9 अगस्त 2022 को जारी भवन अनुज्ञा पत्र के अनुसार केवल आवासीय निर्माण और उपयोग की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद यहां कई महीनों से शराब दुकान संचालित की जा रही है, जो न केवल भू-उपयोग नियमों का उल्लंघन है, बल्कि नगर निगम अधिनियम 1956 के भी विपरीत है।
जांच रिपोर्ट में मंदिर को ही बताया गया ‘अवैध’
विवेक त्रिपाठी ने शिकायत में यह भी कहा कि इस दुकान के पास स्थित आर्य समाज मंदिर को लेकर अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि यह 'मान्य मंदिर' नहीं है, जिससे लाइसेंस प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ता। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिकायत मंदिर के पास अवैध शराब दुकान की थी, और जांच रिपोर्ट में मंदिर को ही अवैध घोषित कर दिया गया। आखिर ऐसा किसके दबाव में किया गया?”
क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर असर
त्रिपाठी ने बताया कि दुकान के चलते स्थानीय माहौल खराब हुआ है। हर दिन वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही और शोरगुल बना रहता है। इससे बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक दुकान का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के लिए चुनौती है।
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प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
त्रिपाठी ने यह भी कहा कि पिछले सात महीनों से लगातार शिकायतें करने के बावजूद न तो नगर निगम, न आबकारी विभाग और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई हुई। प्रशासन को जवाब देना चाहिए कि आखिर किन कारणों से कार्रवाई रोकी गई? और किसके दबाव में जांच रिपोर्ट को प्रभावित किया गया?” विवेक त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यदि समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो स्थानीय नागरिकों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा और कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा।
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तीन प्रमुख मांगे
1. E-4/21 पर संचालित शराब दुकान को तत्काल बंद किया जाए।
2. दुकान के संचालन की अनुमति देने वाले अधिकारियों की जांच हो और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए स्थायी नीति बने।