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Bhopal: गैस पीड़ितों के अस्पताल का ये कैसा हाल, लिफ्ट बंद और सीढ़ियां जर्जर; मरीज परेशान, हॉस्पिटल का रुख ऐसा

Fri, 01 Nov 2024 02:06 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Bhopal News: परिजनों ने बताया कि खराब लिफ्ट और जर्जर सीढ़ियों के चलते मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाना बहुत कठिन हो गया है। मरीजों को स्ट्रेचर, पलंग या व्हीलचेयर पर ढकेलते हुए दौड़ना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफें बढ़ती हैं।
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भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए बना अस्पताल बदहाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया की सबसे बड़ी गैस त्रासदी से पीड़ितों के इलाज के लिए बनाए गए भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) में सुविधाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस अस्पताल में इलाज कराना मुश्किल भरा हो गया है, क्योंकि अस्पताल में लिफ्ट और सीढ़ियों की दुर्दशा से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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लिफ्ट बंद और सीढ़ियां जर्जर
अस्पताल के कई मरीज और उनके परिजनों ने बताया कि यहां लिफ्ट लंबे समय से बंद पड़ी हैं। कुछ लिफ्ट जो अभी काम कर रही हैं, उनमें भी तकनीकी खराबी की समस्या है, जो कभी भी आधे रास्ते में अटक जाती हैं। मरीजों को सीढ़ियों से जाना पड़ रहा है, जो कि जर्जर हो चुकी हैं। रेलिंग कमजोर हो चुकी हैं और इसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की चेतावनियां दी गई हैं। मरीजों के लिए यह स्थिति भयभीत करने वाली है, खासकर उन गंभीर बीमारों के लिए जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं।
 
परिजनों की मुश्किलें बढ़ी
शकील खान, जो अपने परिजन के इलाज के लिए अस्पताल आए थे, ने बताया कि खराब लिफ्ट और जर्जर सीढ़ियों के चलते मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाना बहुत कठिन हो गया है। शकील ने बताया कि मरीजों को स्ट्रेचर, पलंग या व्हीलचेयर पर ढकेलते हुए दौड़ना पड़ता है, जिससे न केवल मरीजों की तकलीफें बढ़ती हैं बल्कि उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है।
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स्टाफ और दवाओं की कमी से इलाज में अड़चनें
अस्पताल में सुविधाओं की कमी केवल लिफ्ट और सीढ़ियों तक ही सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय से डॉक्टरों, स्टाफ और दवाओं की कमी भी बढ़ रही है। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण कई बार मरीजों को इलाज और जांचों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई मरीजों को बाहरी केंद्रों में जांच के लिए भेजा जाता है। साथ ही डॉक्टरों के लगातार दूसरे अस्पतालों में चले जाने से यहां मरीजों का इलाज और भी मुश्किल हो गया है।
 
प्रशासन की लापरवाही
भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर केंद्र सरकार के अधीन है, लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस पर ध्यान न दिए जाने के कारण गैस पीड़ितों की समस्याएं और अधिक बढ़ गई हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुविधाओं का अभाव अस्पताल की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है, जबकि अस्पताल के प्रवक्ता इसे छोटी समस्याएं बताकर नजरअंदाज कर रहे हैं।
 
अस्पताल प्रशासन का रुख
अस्पताल की जनसंपर्क अधिकारी कीर्ति चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ एक लिफ्ट बंद है और उसके मरम्मत प्रस्ताव को CPWD को भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड के समय सीढ़ियों का कम इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई थी। अस्पताल में पर्याप्त लिफ्ट होने के कारण मरीजों को कोई विशेष असुविधा नहीं हो रही है। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लिफ्ट और सीढ़ियों की स्थिति काफी खराब है। उनके सुधार के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
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समाधान की दरकार
भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बनाए गए इस अस्पताल में सुविधाओं का अभाव और प्रशासन की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है। अगर इस स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो यह अस्पताल अपने उद्देश्य को पूरा करने में असमर्थ साबित हो सकता है। मरीज और उनके परिजन प्रशासन से जल्द ही व्यवस्था में सुधार की अपील कर रहे हैं।

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