भोपाल में अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर करणी सेना का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल में चला। दोपहर बाद संगठन का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सीएम हाउस पहुंचा। मुख्यमंत्री के मौजूद न होने से मुलाकात तो नहीं हो सकी, लेकिन अधिकारियों ने हरदा प्रकरण सहित सभी मुद्दों पर 25 नवंबर तक समाधान का भरोसा दिया। आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम स्थल लौटा और मंच से आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई।
सीएम हाउस की ओर कूच, पुलिस ने रोका
खुशीलाल ग्राउंड में करणी सेना का बड़ा क्षत्रिय क्रांति सम्मेलन सुबह से जारी था। संगठन ने चेतावनी दी थी कि दोपहर 2 बजे तक सीएम ऑफिस से कोई अधिकारी बातचीत के लिए नहीं आया तो वे अगली कार्रवाई तय करेंगे। दोपहर 3 बजे तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, तो कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगे। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने रास्ते में ही भीड़ को रोक दिया। बाधा का विरोध करते हुए प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कहा कि वे ज्ञापन पुलिस को नहीं, बल्कि सीधे सीएम ऑफिस के अधिकारी को ही सौंपेंगे।
महिलाएं भी बड़ी संख्या में रहीं शामिल
प्रदर्शन में प्रदेशभर से आई महिलाएं भी शामिल रहीं। प्रदर्शन स्थल पर कई सदस्य रामधुन का कीर्तन करते हुए बैठे दिखे। प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिकारी लगातार बातचीत करते रहे। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत भी सड़क पर धरने में बैठे। उन्होंने कहा कि हरदा में पदाधिकारियों पर दर्ज मामले सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे और संगठन इन्हें वापस लेने तथा जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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क्या है हरदा विवाद?
संगठन और पुलिस के बीच विवाद 1.52 कैरेट के हीरे की कथित खरीद-फरोख्त में 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले से उपजा। करणी सेना पदाधिकारियों ने पुलिस पर आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया था। इसी विवाद के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया। मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना और करणी सेना लगातार कार्रवाई की मांग कर रही है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कूच की घोषणा के बाद पुलिस ने शहर के कई हिस्सों में फोर्स की तैनाती बढ़ा दी थी। भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, शाम तक बातचीत सफल रही और प्रदर्शन शांतिपूर्वक खत्म हो गया।
प्रमुख मांगें
हरदा प्रकरणः क्षत्रिय समाज पर हुए कथित अन्याय की उच्च स्तरीय जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई।
EWS आरक्षण: 10% से बढ़ाकर 20% किए जाने तथा प्रमाणपत्र प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग।
अग्निवीर योजना: सेना में स्थायी भर्ती प्रणाली फिर शुरू करने और अग्नि वीरों को स्थायी सेवा व पेंशन देने का आग्रह।
गौ माता संरक्षणः गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा देने और अवैध तस्करी व हत्या पर कठोर कानून की मांग।
राजनतिक प्रतिनिधित्वः जनसंख्या के अनुपात में विधानसभा, लोकसभा और संगठनात्मक पदों पर उचित जगह।
किसान हितः सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी और नुकसान पर पूरा मुआवजा ।
संस्कृति संरक्षणः क्षत्रिय महापुरुषों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ और अपमानजनक टिप्पणियों पर रोक ।
शिक्षाः हर जिले में 'राजपूत छात्रावास' के लिए शासन से भूमि उपलब्ध कराने की मांग।
एट्रोसिटी एक्टः दुरुपयोग रोकने और गिरफ्तारी केवल जांच के बाद होने का प्रावधान।
धार्मिक संपत्तिः मठ-मंदिरों की जमीन उनके नाम दर्ज करने और अवैध कब्जों पर कार्रवाई।