चंदर सिंह सिसोदिया और माया श्रीवास्तव
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भोपाल में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय कार्यशाला-वॉटर शेड सम्मेलन का शुभारंभ किया। आत्मनिर्भर पंचायत, समृद्ध मध्यप्रदेश’ थीम पर आधारित यह तीन दिवसीय कार्यशाला 26 नवंबर तक कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चलेगी। कार्यक्रम में 2000 से अधिक जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हो रहे हैं। जल-गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। इसाी बीच प्रतिनिधियों ने जमीनी हकीकत रख दी। जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सरपंच तक ने साफ कहा कि गांवों में न तो मूलभूत सुविधाएं हैं और न ही सही योजनाएं पहुंच रहीं जिनकी जरूरत नहीं, वही योजनाएं थोप दी जा रही हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष बोले कार्यशाला दिखावा, जमीन पर हालात अलग
राजगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सिसोदिया ने मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत से अवगत कराया। बाद में बातचीत में उन्होंने कहा कार्यशाला में बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, जबकि गांवों की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत को पिछले तीन साल से कोई काम ही नहीं मिला है। उनके अनुसार पंचायतों के पास अधिकारों की कमी है, जिसके कारण विकास योजनाओं का संचालन रुक गया है। उन्होंने सीएम से पुराने अधिकार बहाल करने की मांग की। सिसोदिया ने कहा मुख्यमंत्री ने मुझे चाय पर बुलाया और कहा कि आप आइए, विस्तृत चर्चा करेंगे।
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जहां जरूरत नहीं वहां योजनाएं
नरसिंहपुर जिले के मेहरगांव की निर्विरोध सरपंच माया श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए भी गहरी असंतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं। जमीन पर उनका असर नहीं दिखता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया की सोलर ऊर्जा योजना घरों की छतों पर प्लांट लगाने की योजना है, लेकिन गांवों में इसकी कोई जानकारी ही नहीं पहुंची। इसी प्रकार जल संवर्धन योजना में भी सही तरीके से काम नहीं हो रहा है।
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मूलभूत सुविधाएं जरूरी
उन्होंने बताया कि मेरा गांव नदी किनारे है, वहां जल संरक्षण की आवश्यकता नहीं। फिर भी वहां काम करवाया जा रहा है, जबकि जिन गांवों में पानी की भारी कमी है, वहां यह योजनाएं नहीं पहुंचीं। सरपंच ने कहा कि मूलभूत सुविधाएं चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाएं, प्राथमिक ढांचा सबसे पहले दुरुस्त होना चाहिए, लेकिन इनके बजाय ऐसी योजनाएं दी जा रही हैं जिनकी क्षेत्र में कोई जरूरत ही नहीं है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को होने वाले विशेष सेशन में वे अपनी समस्याओं और गांवों की वास्तविक जरूरतों को अधिकारियों के सामने रखेंगे।