मध्य प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब उसके छात्र संगठन एनएसयूआई तक भी पहुंचती नजर आ रही है। संगठन में अनुशासन कमजोर पड़ता दिख रहा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जिला अध्यक्ष प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे। प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की अपील के बावजूद कई जिला अध्यक्षों ने न तो संगठन के कार्यक्रमों में रुचि दिखाई और न ही बैठकों में शामिल होना जरूरी समझा। हाल ही में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन करने का निर्णय लिया था। इसकी जिम्मेदारी सभी जिला अध्यक्षों को सौंपी गई थी, लेकिन कई जिलों में यह कार्यक्रम आयोजित ही नहीं किया गया। संगठन ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन सूत्रों के अनुसार कई जिला अध्यक्षों ने नोटिस का जवाब तक देना उचित नहीं समझा।
प्रदेश स्तरीय बैठक में नहीं पहुंचे
इसके बाद भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई गई।एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने संगठन के समूह में स्पष्ट संदेश दिया था कि बैठक में सभी जिला अध्यक्षों की उपस्थिति अनिवार्य है। इसके बावजूद आधे से ज्यादा जिला अध्यक्ष बैठक से अनुपस्थित रहे। कई पदाधिकारी भी बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे संगठन की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, प्रदेश प्रभारी रविंद्र दांगी ने संगठन में किसी तरह के मतभेद या बिखराव से इनकार किया है। उनका कहना है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और कुछ जिला अध्यक्ष व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार सक्रिय है और सभी पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
यह भी पढ़ें-मानसून की रफ्तार धीमी, MP के 40 जिले अब भी इंतजार में,जून में 38% कम बारिश, आज भारी वर्षा का अलर्ट
एक साल से खत्म हो चुका प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल
छात्र संगठन के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे का कार्यकाल करीब एक वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि संगठन जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर सकता है। इसे लेकर कई नेता सक्रिय हो गए हैं और अलग-अलग स्तर पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि इसी कारण संगठन के भीतर गुटबाजी भी बढ़ रही है।
यह भी पढ़ें-बच्चों को हुनर सिखाने वाले खुद बेरोजगार,भोपाल में सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरन
युवा संगठन में बढ़ती दूरी कांग्रेस के लिए चिंता
छात्र संगठन कांग्रेस का सबसे बड़ा युवा आधार माना जाता है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में युवाओं के बीच माहौल बनाने और संगठन को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी इसी संगठन पर रहती है। ऐसे में यदि संगठन के भीतर ही अनुशासनहीनता और आपसी खींचतान बनी रहती है तो इसका असर कांग्रेस की राजनीतिक तैयारियों पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नया प्रदेश अध्यक्ष कब घोषित होता है और क्या वह संगठन में बढ़ती गुटबाजी को खत्म कर जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर ला पाएगा, या फिर छात्र संगठन की यह अंदरूनी कलह आगे और गहराएगी।