मध्यप्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्तियों को लेकर एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) में शिकायत पहुंची है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कई सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और अन्य नियमित कर्मचारी अपने सरकारी पद पर कार्यरत होने के बावजूद निजी नर्सिंग कॉलेजों में कागजों पर फैकल्टी के रूप में दर्ज हैं। इस मामले को लेकर एनएसयूआई ने सोमवार को NHM की मिशन संचालक को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा और तत्काल जांच एवं कार्रवाई की मांग की।
कागजों पर फैकल्टी, हकीकत में सरकारी कर्मचारी
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि सरकारी वेतन पर कार्यरत NHM कर्मचारी निजी नर्सिंग कॉलेजों की फैकल्टी सूची में शामिल हैं, जिससे कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता दिलवाई जा रही है। यह न सिर्फ नर्सिंग काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय सेवा आचरण नियमों के तहत दंडनीय अपराध भी है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह घोटाला संगठित तरीके से किया जा रहा है, जिसमें सरकारी कर्मचारी और निजी संस्थान दोनों की मिलीभगत है।
एनएसयूआई की प्रमुख मांगें
1. फर्जी फैकल्टी के रूप में दर्ज सभी NHM/CHO कर्मचारियों की जांच की जाए।
2. दोहरी नियुक्ति पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. फर्जी नियुक्ति के दौरान प्राप्त वेतन/मानदेय की राशि की वसूली की जाए।
4. सभी जिलों के CMHO को निर्देशित किया जाए कि वे NHM कर्मचारियों की सूची का मिलान नर्सिंग काउंसिल में दी गई फैकल्टी सूची से करें।
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न्यायालय और CBI में ले जाएंगे मामला
जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने इस घोटाले को "व्यवस्थित भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा है, जिसमें सरकारी पदों पर बैठे लोग और निजी कॉलेज संचालक नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन और शैक्षिक व्यवस्था दोनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो एनएसयूआई दस्तावेज़ों के साथ माननीय न्यायालय और CBI जांच की मांग करेगा।
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शासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग
एनएसयूआई का कहना है कि इस प्रकार की दोहरी नियुक्ति और फर्जी फैकल्टी दिखाने की प्रवृत्ति से प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों गंभीर संकट में हैं। संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में उदाहरण स्वरूप कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस प्रकार की धोखाधड़ी करने का साहस न कर सके।