एम्स भोपाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा जगत में भारत का गौरव बढ़ाया है। संस्थान के दो वरिष्ठ सर्जनों ने दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) में आयोजित इंटरनेशनल हैंड एंड रिस्ट कॉन्ग्रेस एवं हैंड थेरेपी सिम्पोजियम में हाथ और कलाई की जटिल सर्जरी से जुड़ी नवीन तकनीकें प्रस्तुत कीं। यह सम्मेलन एमिरेट्स हैंड सर्जरी सोसाइटी और सिंगापुर सोसाइटी फॉर हैंड सर्जरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें 30 से अधिक देशों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
जाने क्या है तकनीक
एम्स भोपाल के प्रो. (डॉ.) मनाल एमखान, प्रोफेसर एवं प्रमुख, बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभाग, ने हाथ और कलाई की चोटों में फ्लैप कवरेज विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गंभीर हाथ और कलाई की चोटों में त्वचा और ऊतक के नुकसान के बाद फ्लैप कवरेज तकनीक के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र को फिर से कार्यक्षम बनाया जा सकता है। इस तकनीक में शरीर के किसी अन्य हिस्से से त्वचा, ऊतक या रक्त वाहिकाओं को स्थानांतरित कर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की जाती है। यह प्रक्रिया न केवल अंग की कार्यक्षमता बनाए रखती है, बल्कि संक्रमण के खतरे को भी कम करती है।
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कम जटिल, सुरक्षित और रिकवरी के लिहाज से तेज तकनीक
वहीं, डॉ. गौरव चतुर्वेदी, अतिरिक्त प्रोफेसर, बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभाग, ने फर्स्ट डॉर्सल मेटाकार्पल आर्टरी (FDMA) फ्लैप पर अपनी उन्नत ऑपरेटिव तकनीक प्रस्तुत की। FDMA फ्लैप तकनीक हाथ की अंगुलियों या अंगूठे में गंभीर चोट लगने की स्थिति में बेहद उपयोगी है। इसमें हाथ के ऊपरी हिस्से से एक पतला त्वचा-ऊतक फ्लैप लेकर उसे प्रभावित हिस्से पर स्थानांतरित किया जाता है, जिससे अंग का आकार, लचीलापन और कार्यक्षमता दोबारा प्राप्त की जा सके। यह तकनीक पहले से प्रचलित सर्जरी विधियों की तुलना में कम जटिल, सुरक्षित और रिकवरी के लिहाज से तेज मानी जाती है।
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प्रस्तुति को काफी मिली सराहना
सम्मेलन में दुनियाभर के विशेषज्ञों ने हाथ और कलाई की जटिल सर्जरी, माइक्रोवास्कुलर तकनीक, पुनर्वास और थेरेपी के क्षेत्र में नवीन प्रगति पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान भारतीय विशेषज्ञों की प्रस्तुति को काफी सराहना मिली। एम्स भोपाल प्रशासन का कहना है कि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी से न केवल संस्थान की साख बढ़ी है, बल्कि इससे चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उपचार सेवाओं में नई दिशा भी मिलेगी।