मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। दरअसल राजधानी भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज में डेढ़ करोड़ की लागत से आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी सिम्युलेटर लैब की शुरुआत की गई है। अब जीएमसी में स्पोर्ट इंजरी के विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। इस लैब में सबसे पहले जीएमसी ऑर्थोपेडिक विभाग के रेसिडेंट डॉक्टर्स को बेसिक स्पोर्ट्स इंजरी कोर्स में की ट्रेनिंग दी जाएगी। अगले वर्ष से प्रदेशभर के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए एडवांस कोर्स शुरू किया जाएगा।
लैब शुरू करने से पहले किया गया शोध
गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि लैब शुरू करने से पहले जीएमसी ने एक शोध किया, जिसमें पाया गया कि सिम्युलेटर मशीन पर प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स की सर्जिकल स्किल अन्य की तुलना में अधिक बेहतर थी। साथ ही, उनके द्वारा ऑपरेट किए गए मरीजों की रिकवरी भी तेजी से हुई। अब सिम्युलेटर पर प्रैक्टिस के बाद असली सर्जरी नई लैब में डॉक्टर्स आर्थोस्कोपी सिम्युलेटर मशीन पर सर्जरी की प्रैक्टिस करेंगे। उनका प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर उन्हें केडेवर (मानव अंग मॉडल) पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन दोनों चरणों को पूरा करने के बाद ही वे वरिष्ठ डॉक्टर्स की देखरेख में मरीजों की सर्जरी कर पाएंगे।
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मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
गांधी मेडिकल कॉलेज ऑर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ. आशीष गोहिया ने बताया कि यह चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। इस लैब से प्रदेशभर के डॉक्टर्स को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने बताया कि सिम्युलेटर सिस्टम की मदद से डॉक्टर्स बिना किसी वास्तविक सर्जरी के अभ्यास कर सकते हैं, जिससे उनकी दक्षता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।