इस्कॉन द्वारा भोपाल में शनिवार को श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता रही, जिसने समूचे नगर को भक्ति और प्रेम के रंग में रंग दिया।भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव और माता सुभद्रा को भव्य रथ में विराजमान कर सायं 4 बजे भोपाल टॉकीज चौराहा से यात्रा प्रारंभ हुई। नगर निगम भोपाल की महापौर मालती राय ने दीप प्रज्वलन एवं आरती कर रथयात्रा का शुभारंभ किया। रथयात्रा के मार्ग में राह चलते लोग भी रुककर इस अलौकिक यात्रा में सम्मिलित होते दिखे और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि में झूमते हुए नृत्य कर भक्ति रस में सराबोर हो गए।
पुणे से मंगाए गए 100 किलो फूल
सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित रथ का श्रृंगार पुणे से मंगाए गए 100 किलोग्राम फूलों से किया गया था। यात्रा मार्ग में जगह-जगह समाज के विभिन्न वर्गों एवं संस्थानों द्वारा रथ का स्वागत किया गया। जिनमें दुर्गा मंदिर, काली मंदिर, गुरुद्वारा, मालाबार ज्वेलर्स और होंडा शोरूम जैसे प्रतिष्ठान प्रमुख रहे। कई स्थानों पर पुष्प वर्षा और भव्य आरती द्वारा भगवान का स्वागत हुआ।रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन में झूमकर भक्ति रस का अनुभव किया। सैकड़ों विदेशी भक्त विशेषकर रूस से आए हुए भक्त भी इस यात्रा में सम्मिलित हुए। 500 किलोग्राम खाजा प्रसाद श्रद्धालुओं एवं जनसाधारण में वितरित किया गया।
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युवाओं की सहभागिता रही विशेष आकर्षण
इस पवित्र उत्सव में इस्कॉन से जुड़े सैकड़ों युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वे भगवद्गीता और अन्य वैदिक ग्रंथों का निःशुल्क वितरण कर जनसामान्य में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने हेतु प्रयासरत रहे। साथ ही एक विशेष स्वच्छता दल पूरे रथ मार्ग में तैनात रहा, जो यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे को तुरंत साफ करता रहा स्वच्छता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
प्लैटिनम प्लाजा पर हुआ समापन
रथयात्रा का समापन प्लैटिनम प्लाजा पर संध्या आरती के साथ हुआ, जहां विधायक एवं राज्य मंत्री कृष्णा गौर की विशेष उपस्थिति रही। समापन अवसर पर उपस्थित हजारों भक्तों को हलवा प्रसाद वितरित किया गया।
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यह परंपरा हजारों वर्षों पुरानी
इस अवसर पर इस्कॉन के वरिष्ठ ब्रह्मचारी श्रीमान सव्यसाची प्रभु ने कहा कि सनातन परंपरा में रथयात्रा एकमात्र ऐसा उत्सव है जिसमें मंदिर के मूल अर्चविग्रह भक्तों को दर्शन देने बाहर आते हैं। यह परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है और पद्म पुराण, स्कंध पुराण जैसे अनेक ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस्कॉन द्वारा विश्वभर में 1000 से अधिक शहरों में प्रतिवर्ष रथयात्रा महोत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिससे लाखों लोगों को भक्ति, सेवा और अध्यात्म का लाभ प्राप्त होता है।