यूनियन कार्बाइड हादसे के पीड़ितों के पांच संगठनों ने आज गर्भस्थ बच्चों के स्वास्थ्य पर हादसे की वजह से हुए क्षति पर हाल ही में प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट को लेकर मीडिया से बात की। संगठनों की तरफ इस महीने की शुरुआत में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षों के बारे में बताया। 'डाव कार्बाइड के खिलाफ बच्चे' संगठन की नौशीन खान ने कहा कि अध्ययन में पाया गया है कि भोपाल हादसे के दौरान जो लोग अपनी मां के गर्भ में थे, उनमें कैन्सर होने की आशंका 8 गुना अधिक थी | साथ ही सामान्य बच्चों की तुलना में इन बच्चों में रोजगार बाधित करने वाली विकलांगता और शिक्षा का निम्न स्तर था । भारत सरकार द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि हादसे के समय कारखाने से 100 किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों पर भी हादसे का प्रभाव देखा जा सकता है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा रशीदा बी ने कहा कि हम उन पांच शोधकर्ताओं को बधाई और धन्यवाद देते हैं जिन्होंने यूनियन कार्बाइड और भारत सरकार द्वारा इसके प्रभाव को जानबूझकर कम करने के खिलाफ हादसे की भयावहता और दीर्घकालिक परिणामों पर हमारे रुख की पुष्टि की है। हम मांग करते हैं कि यूनियन कार्बाइड और डाव केमिकल कम्पनी हादसे की अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दे।
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा कि यह वैज्ञानिक प्रकाशन राज्य और केंद्र की सरकारों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए। शोध के सभी निष्कर्ष सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित हैं। सरकार ने कम्पनी के पीड़ितों के हितों की रक्षा के वादे के बदले में भोपाल के पीड़ितों से यूनियन कार्बाइड पर मुकदमा चलाने का अधिकार छीन लिया है। यदि सरकारें यूनियन कार्बाइड से अगली पीढ़ी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कानूनी कदम नहीं उठाती हैं तो यह उस वादे के साथ विश्वासघात होगा।
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव के बताया कि यह प्रकाशन भोपाल में यूनियन कार्बाइड के पीड़ितों पर सभी चिकित्सा अनुसंधान को छोड़ने के निर्णय की तत्काल समीक्षा का भी आह्वान करता है। जैसा कि अध्ययन में कहा गया है, सरकार, पुनर्वास मुहैया कराने में अपनी विफलता के कारण, गैस पीड़ितों की संतानों को हुई आर्थिक और सामाजिक क्षति की भरपाई करने के लिए भी बाध्य है।