राजधानी भोपाल में हर दिन डेढ़ लाख से ज्यादा लोग सिटी बसों में सफर करते हैं। इन बसों में मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई के बाद भी घटनाओं में कंट्रोल नहीं हो रहा है। करीब 40 दिन के भीतर तीन घटनाएं सामने आई है। अब ऑटो चालक ने बस कंडक्टर और ड्राइवर की पिटाई कर दी है। ऑटो चालक के ऊपर FIR भी दर्ज की गई है। इससे पहले 14 सितंबर को भी परिचालक से मारपीट करने का मामला सामने आया था।
रात में हुई मारपीट के दौरान दहशत में आए यात्री
मिली जानकारी के अनुसार रविवार रात को भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एक ऑटो चालक ने सिटी बस के चालक और परिचालक के साथ मारपीट की। इसके चलते बस के अंदर बैठे यात्री दहशत में आ गए। सिटी बस में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह घटना कैद हुई है। बस परिचालक शुभम मेहरा निवासी मछली मार्केट बैरागढ़ की रिपोर्ट पर एमपी नगर पुलिस ने ऑटो चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एमपी नगर थाने प्रभारी जय हिंद शर्मा ने बताया कि ऑटाे चालक को जमानत पर छोड़ दिया है। चालान पेश होने के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा।
ऑटो चालक ने बस ड्राइवर पर लगाया आरोप
एमपी नगर पुलिस के अनुसार ऑटो चालक का कहना है कि बस ने ऑटो को टक्कर मारी थी, इसलिए विवाद हुआ। शुभम ने बताया वह सिटी बस नंबर एमपी 04 पीए 4329 का परिचालक है। बस चिरायु से आकृति ईको सिटी सलैया तक चलती है । रविवार रात को बस बोर्ड ऑफिस चौराहा स्थित स्टाप पर आकर रुकी। तभी सामने खड़ा एक आटो चालक विशाल आया। गालियां देते हुए उसने मुझे और चालक को लात-घुसे से पीटना शुरू कर दिया। इससे दोनों को चोट आई हैं। जबकि परिचालक शुभम ने बताया आटो चालक विशाल नशे में था वो गालियां दे रहा था । मारपीट करने से यात्री दहशत में आ गए और उतरकर चले गए थे। इस संबंध में बीसीएलएल के मैनेजर रोहित यादव ने बताया कि यह घटना रविवार रात की है। बीसीएलएल की तरफ से थाने के संज्ञान के लिए एक पत्र सौंपा गया है।
12 दिन पहले परिचालक को मारी थी छुरी
राजधानी भोपाल के बोर्ड आफिस चौराहे पर खड़ी सिटी बस के परिचालक को एक युवक ने 12 दिन पहले छुरी मारी थी। इससे वह घायल हो गया। इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी बसों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा चुकी हैं। गौरतलब है कि शहर की सड़कों पर 25 रूट पर करीब 200 सिटी बसें दौड़ रही हैं। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड इनका संचालन कर रहा है। सिटी बसों में एक दिन में करीब डेढ़ लाख यात्री सफर करते हैं। किराये के रूप में उन्हें न्यूनतम सात और अधिकतम 42 रुपए लगते हैं। सभी बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और कैमरे होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन वारदात के बाद भी जेबकतरों को पुलिस नहीं पकड़ पाती।