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Bhopal: सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को भी लगानी होगी ई-अटेंडेंस, अतिथि शिक्षकों ने जताया विरोध

Sun, 29 Jun 2025 04:47 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

सरकारी सरकारी स्कूल से गायब रहने वाहे शिक्षकों पर रोक लगाने के लिए विभाग इस वर्ष प्रदेश भर के सभी सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था की है। इसी कड़ी में अतिथि शिक्षकों को भी जोड़ा गया है। जिसे लेकर अतिथि शिक्षकों ने विरोध दर्ज कराया है। 
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डीपीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमपी के सरकारी सरकारी स्कूल से गायब रहने वाहे शिक्षकों पर रोक लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष प्रदेश भर के सभी सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था की है। 1 जुलाई से सभी शिक्षकों को ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। इसी कड़ी में अतिथि शिक्षकों को भी जोड़ा गया है। जिसे लेकर अतिथि शिक्षकों ने विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि नियमित शिक्षकों की तरह ई-अटेंडेंस के लिए हम तैयार हैं, लेकिन हमें भी नियमित शिक्षकों की तरह सारी सुविधाएं भी दी जाएं।अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि अतिथि शिक्षकों से जब नियमित शिक्षकों जैसे सारे कार्य और E अटेंडेंस लेना है तो उनको समान वेतनमान, पदनाम, अवकाश सुविधा और अधिकार दिया जाए। क्या शिक्षा विभाग अतिथि शिक्षकों को ऐसे ही बंधुआ मज़दूर बनाकर रखेगा। 
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नियमित शिक्षक भी कर रहे विरोध
दरअसल सरकार ने तय किया है कि शिक्षकों को ई अटेंडेंस लगानी अनिवार्य है। इसके लिए एप बनाया गया है जिसके माध्यम से शिक्षण संस्थान में जा कर लाइव अपडेट करना होता है। शिक्षक इससे सहमत नहीं है। उनकी अपनी समस्याएं हैं। उनका तर्क है कि सरकार यदि इसे नीति ही बना रही है तो सभी कर्मचारियों पर यह नीति लागू होनी चाहिए, सिर्फ शिक्षक ही क्यों?
 
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अतिथि शिक्षकों का बना दिया गया मजाक 
अतिथि शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि लगातार मध्य प्रदेश सरकार के साथ अधिकारी भी अतिथि शिक्षकों के भविष्य को मजाक बना कर रख दिया है। उनका शोषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ा  पिछले चार-पांच साल से ऑनलाइन के नाम पर हर सत्र में दो से तीन महीने तक अतिथि शिक्षकों को ऑनलाइन अपडेशन के नाम पर परेशान किया जाता है। जिससे अतिथि शिक्षक मानसिक रूप से तो परेशान होता ही है साथ में ही आर्थिक रूप से भी परेशान हो जाता है क्योंकि हर बार उन्हें एमपी ऑनलाइन जा करके 500 से लेकर 1000 तक खर्च करने पड़ते हैं। उसके बाद भी अधिकारी द्वारा बनाया गया पोर्टल सही ढंग से कार्य नहीं करता और वह साल भर परेशान होते रहते हैं। 

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अतिथि और नियमित शिक्षक में भेदभाव 

1- शिक्षा विभाग ने अतिथि को मोबाइल प्रदान नही दिए जबकि नियमित शिक्षकों को दिए हैं।
2- शिक्षा  विभाग ने 16 वर्ष से अतिथि शिक्षकों का पदनाम परिवर्तित नही किया जबकि कार्य तो पूरा लिया जाता है। 
3- शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों को नियमित शिक्षकों जैसे वेतनमान और अवकाश नही दिए हैं,जबकि सरकारी शिक्षकों को सब कुछ दिया है उसके बावज़ूद भी विरोध हो रहा है।
4- शिक्षा विभाग अतिथि शिक्षकों को मानदेय दे रहा है न कि वेतनमान। 
5-  अतिथि शिक्षक एक काम चलाऊ व्यवस्था के अंतर्गत है जिसको शिक्षा विभाग ने वर्तमान तक किसी भी योजना और मजदूर या कर्मचारी की श्रेणी मे नही रखा है।
6- अतिथि शिक्षकों मे तो अनुभव प्रमाण पत्र की योग्यता केवल 3 वर्ष की है , इससे से अधिक वाले अनुभव की भी कोई मूल्य नही।
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