विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदेश में बिजली की बकाया राशि की वसूली में बरती जा रही अति सख्ती पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल समय पर जमा ना करने वालों में अधिकतर किसान हैं और इनमें भी 90% छोटे और सीमांत किसान हैं।
पानी के अभाव में नष्ट होने के कगार फसल पर
अजय सिंह ने कहा है कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अचानक ही सख्ती किए जाने के कारण किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। क्योंकि जिन गांवों का ज्यादा बिल बकाया है वहां पर पूरे गांव की बिजली काटी जा रही है। लिहाजा गर्मी के समय गांव में पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है साथ ही गर्मियों की सब्जियां लगाने वाले किसानों की फसल पानी के अभाव में नष्ट होने की कगार पर है।ऐसे में बिजली बिल वसूली में अति सख्ती न की जाकर अधिकारियों को किसानों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाया जाना चाहिए ताकि आक्रोश के कारण पैदा होने वाली अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
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गरीब किसानों पर जोर जबरदस्ती की अति
उन्होंने कहा कि भू राजस्व संहिता के अंतर्गत सी फार्म और कुर्की करने, बैंक खाते सील करने और खसरों में बकाया राशि की जानकारी दर्ज करने तथा धारा 138 के प्रकरण बनाए जाने जैसी कार्यवाही गरीब किसानों पर जोर जबरदस्ती की अति है। पहले आपसी बातचीत, समझाईश, ग्राम पंचायत के सहयोग आदि के माध्यम से भी बिजली बिल वसूली की कार्यवाही की जा सकती है। इसके बाद चेतावनी दी जाए। शुरू से ही सख्ती करने पर किसानों में आक्रोश पैदा होगा। अजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि वे समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसानों और बिजली कंपनियों के लिए कोई बीच का रास्ता निकाले ताकि बिजली बिल भी वसूला जाए और किसानों तथा जनता को अकारण परेशानी से बचाया जा सके।