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Bhopal: भोपाल में कोरोना के 9 मरीज मिलने के बाद भी नहीं शुरू हुई RT-PCR जांच,निजी लैबों में करानी पड़ रही जांच

Fri, 06 Jun 2025 09:44 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है राजधानी भोपाल में भी 9 मरीज मिल चुके हैं इसके बावजूद अभी तक सरकारी अस्पतालों में आरटी-पीसीआर जहां शुरू नहीं हो पाई है। लक्षण वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में जांच करनी पड़ रही है।
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कोरोना टेस्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है राजधानी भोपाल में भी 9 मरीज मिल चुके हैं इसके बावजूद अभी तक सरकारी अस्पतालों में आरटी-पीसीआर जहां शुरू नहीं हो पाई है। लक्षण वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में जांच करनी पड़ रही है। प्रदेश में  पहला केस 23 मई को सामने आया था। अब तक सामने आए कुल 50 मामलों में से करीब 40% मरीज या तो देश के अन्य राज्यों से लौटे थे या किसी बाहर से आए संक्रमित के संपर्क में आए थे। यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बीते 20 दिनों में देशभर में एक्टिव केस 93 से बढ़कर 5,364 हो गए हैं। यानी 16 मई की तुलना में 6 जून को देश में 5,274 ज्यादा एक्टिव केस हैं।
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स्वास्थ्य विभाग दी जानकारी 
भोपाल में पहली बार स्वास्थ्य विभागन कोरोना पॉजिटिव मरीजों की जानकारी दी है। सीएमएचओ डॉ.प्रभाकर तिवारी ने बताया कि कोविड-19 के भोपाल में इस साल अब तक 9 नए प्रकरण सामने आए हैं। अप्रैल में 01 मई में 3 एवं जून में 5 पॉजिटिव केसेज मिले हैं। वर्तमान में 4 एक्टिव केस हैं। इनमें से एक मरीज अन्य बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती था तथा अन्य बीमारियों के जांच के समय कोविड पॉजिटिव पाया गया। 3 व्यक्तियों को कोविड पॉजिटिव पाए जाने, किंतु कोई विशेष लक्षण न होने (Asymptomatic) होने के कारण घर पर रहकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 5 व्यक्ति लक्षणों से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं।  


मध्य प्रदेश में अभी तक सारी जांचे निजी लबों में हुई
मध्यप्रदेश में बुधवार और गुरुवार को 17 नए केस सामने आए हैं, जिससे कुल एक्टिव केस 36 हो गए हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में RT-PCR जांच ठप है, क्योंकि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब तक किट खरीदी के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया है। साल 2020 में जो रेट तय किए गए थे, वे 2023 में समाप्त हो गए। 2024 में आवश्यकता नहीं पड़ी, लेकिन अब केस बढ़ने लगे हैं, तो सरकारी अस्पतालों में जांच नहीं हो पा रही। लोग निजी लैब में 1200 से 1500 रुपए देकर जांच कराने को मजबूर हैं। अब तक आए सभी केसों की जांच निजी लैब में हुई है।
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 हमीदिया की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन खा रही धूल
कोरोना की दूसरी लहर में हुई भारी मौतों के बाद मध्यप्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में जीनोम सीक्वेंसिंग लैब स्थापित करने का फैसला लिया गया था, लेकिन भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की स्टेट वायरोलॉजी लैब और इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज को छोड़कर, बाकी किसी भी मेडिकल कॉलेज में अभी तक मशीनें नहीं आई हैं। हमीदिया अस्पताल में लगाई गई मशीन का अभी तक इस्तेमाल ही नहीं किया गया। कोविड वायरस को फैलने से रोकने, उसके असर की बारीकी से निगरानी करने और सटीक जानकारी देने के मकसद से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मध्यप्रदेश की स्टेट वायरोलॉजी लैब को 5 करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन दी थी। 
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सिर्फ एम्स में जांच की सुविधा उपलब्ध
कोविड अलर्ट के बीच केवल एम्स भोपाल अकेला सरकारी अस्पताल है, जहां कोरोना की जांच के लिए आरटी-पीसीआर किट मौजूद हैं। संस्थान ने किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया है, जिससे कोविड संक्रमण की सटीक पहचान संभव है।
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