राजधानी भोपाल के आसपास क्षेत्र में लगातार पेड़ काटने के मामले सामने आ रहे हैं। अब केरवा डैम के आस-पास पेड़ों की कटाई की शिकायत मुख्य वन संरक्षक से की गई है। जानकारी के मुताबिक टाइगर मूवमेंट एरिया में हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। पिछले दो-तीन महीने में ही 50 से अधिक पेड़ों की कटाई हो चुकी है। वहीं, अवैध झुग्गियों की बसाहट, कचरा फेंकने, आग की घटनाएं भी हो रही हैं।
आसपास 30 से 35 बाघों का मूवमेंट
जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल के आसपास 30 से 35 बाघों का मूवमेंट रहता है। खासकर केरवा डैम, कलियासोत डैम के आसपास इनका मूवमेंट देखने को मिलता रहता है। कई बार ये सड़कों पर भी घूमते नजर आते हैं। वहीं, मदर बुल फॉर्म में भी बाघ देखे जा चुके हैं। इन बाघों का जहां बसेरा है, वहीं पर पेड़ों के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसे लेकर बाघ मित्र राशिद नूर ने वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक से लिखित में शिकायत भी की है।
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वन चौकी के नजदीक होने के बावजूद काट रहे पेड़
बाघ मित्र नूर ने अनुसार इलाके में प्लानिंग के तहत 50 से अधिक पेड़ों की कटाई कर दी गई है। यह कार्य वन चौकी के नजदीक होने के बावजूद किया गया। यह क्षेत्र बाघों के मूवमेंट का प्रमुख हिस्सा है, जो बैरागढ़ चिचली से लेकर केरवा डैम के पिछले हिस्से तक फैला है। इस पूरे क्षेत्र में पहले ही एक चौड़ी 4 लेन सड़क बना दी गई है और अब केवल बीच का प्राकृतिक वन ही बचा है। जिसे पतली सड़क से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि इससे यह प्रतीत होता है कि वन क्षेत्र की घनता को कमजोर कर, धीरे-धीरे निजी भूमियों तक निर्माण और विकास कार्यों के रास्ते खोलने की साजिश रची जा रही है। जंगल में कचरा फेंका जाना एवं आगजनी की घटनाएं भी हो रही हैं। यह न केवल जंगल को नष्ट कर रहा है, बल्कि वन्य जीवों के जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। वन भूमि के आसपास झुग्गियों की अवैध बसाहट भी हो रही है।
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दोषियों पर की जाए सख्त कार्रवाई
बाघ मित्र नूर ने मांग की है कि इस संपूर्ण मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच करवाई जाए और दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जाए। क्षेत्र को तत्काल संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करते हुए वहां कोई भी गैर-वन गतिविधि जैसे निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, वृक्ष कटाई आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। केरवा डैम-बैरागढ़ चिचली के बीच बची हुई वन पट्टी को बाघ कॉरिडोर के रूप में संरक्षित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के WP(C) 202/1995 के निर्देशों के उल्लंघन की जानकारी लेकर माननीय न्यायालय को अवगत कराया जाए। वन्य जीवों की सुरक्षा और मानव-पशु टकराव की रोकथाम हेतु स्थायी निगरानी समिति गठित की जाए। क्षेत्र में कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जाए एवं आगजनी पर नियंत्रण हेतु फायर प्रोटेक्शन योजना बनाई जाए। झुग्गी बसाहट को तत्काल हटाया जाए एवं भविष्य में पुनः बसने से रोका जाए। वन चौकियों पर तैनात संदिग्ध एवं भ्रष्ट कर्मचारियों को हटाकर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।