भोपाल का ये रेलवे ओवरब्रिज अपने मोड़ के कारण चर्चा में है।
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कौन-से दो विभाग हैं आमने-सामने?
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 2018 में पहली बार पेश किए गए डिजाइन को रेलवे ने नकार दिया था। फिर 120 डिग्री की निर्माण संचरना पर सहमति बनी। इसमें सर्कुलर पिलर का प्रावधान था। उनका कहना है कि रेलवे ने अपनी जगह पर दीवारनुमा पिलर बना दिए। स्पान पर कैप जैसा डिजाइन भी नहीं बना। इसके चलते कम जगह में ब्रिज का निर्माण करवाना पड़ा। दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी को ब्रिज की डिजाइन के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था।
क्या कहता है आईआरसी-38?
अधिकारियों के अनुसार इंडियन रोड कांग्रेस के 38 कोड में प्रावधान है कि यदि कहीं पर जमीन की समस्या हो तो शहरी इलाकों में न्यूनतम 30 किमी प्रति घंटे रफ्तार से आवागमन लायक ब्रिज का निर्माण कराया जा सकता है।
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अब आगे क्या?
अधिकारियों ने बताया कि जमीन की कमी और आसपास मेट्रो स्टेशन की मौजूदगी के कारण तीखा मोड़ बनाया गया था। अब थोड़ी और जमीन लेकर मोड़ की गोलाई बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इसे लेकर पीडब्ल्यूडी और रेलवे के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है। रेलवे के अधिकारियों ने डिजाइन का नया प्रस्ताव मांगा है। इसकी फिजिबिलिटी जांचने के बाद स्वीकृति पर फैसला हो सकेगा।
क्या विकल्प मौजूद हैं?
- एनएचएआई के निदेशक ने निरीक्षण के बाद शासन को मौखिक रूप से बताया है कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार स्थल पर उपलब्ध भूमि के आधार पर निर्माण कार्य के लिए अन्य कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।
- वहीं, एनएचएआई के कंसल्टेंट ने भी अपना मत दिया है कि ओवरब्रिज पर वाहनों की रफ्तार कम रखते हुए यातायात संचालित किया जा सकता है।
- दो विकल्प खुद मुख्यमंत्री ने बता दिए हैं। पहला- इसे दुरुस्त किया जाएगा। दूसरा- ज्यादा समस्या आएगी तो इसे दोबारा बनवाया जा सकता है।