मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ने वाले अतिथि शिक्षक जहां नियमितिकरण को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं अब उनके सामने दूसरी परेशानी खड़ी हो गई है। दअरसल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती करने की तैयारी में है। अतिथि शिक्षकों को आयु सीमा में नौ साल की वृद्धि की गई है। साथ ही तीन सत्र का अनुभव प्रमाण पत्र भी मांगा गया है, लेकिन अप्रैल तक का अनुभव प्रमापणपत्र नहीं बनने से करीब 10 हजार अतिथि शिक्षक अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक बनने से वंचित रहेंगे।
13,089 प्राथमिक शिक्षकों की होगी भर्ती
मप्र कर्मचारी चयन मंडल (इएसबी) 13,089 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती करने की तैयारी में है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षक के 10,150 और जनजातीय कार्य विभाग के 2939 पदों पर भर्ती होगी। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा के लिए एक अगस्त तक आवेदन करना है। आवेदन पत्र में संशोधन छह अगस्त किया जा सकेगा। परीक्षा शुरू होने की संभावित तारीख 31 अगस्त से है। इसमें प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2020 और 2024 के पात्र अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं।
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जाने का क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक प्रदेश के करीब 10 हजार अतिथि शिक्षक अप्रैल 2025 तक शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान सत्र 2025-26 के अप्रैल माह तक का अनुभव प्रमाण-पत्र अब तक जारी नहीं किया गया है, जबकि उन्हें अप्रैल तक की सैलरी भी मिल गई है। चयन परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन के समय अनुभव प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य हैं। वर्तमान में केवल पिछले सत्र 2024-25 के मार्च माह तक के अनुभव प्रमाण-पत्र बनाए गए हैं। इस कारण अतिथि शिक्षक परेशान हैं। उन्हें कम से कम तीन सत्र में 200 दिन का अनुभव होना चाहिए।
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हमें अप्रैल तक का लाभ दिया जाए
अतिथि शिक्षिका सुरभि चौहान का कहना है कि वर्तमान सत्र 2025-26 के अप्रैल तक शिक्षण कार्य किया है, लेकिन विभाग अनुभव प्रमाण-पत्र पिछले सत्र 2024-25 के मार्च तक ही दे रहा है। जब भर्ती में अनुभव मांगा जा रहा है तो हमें अप्रैल तक का लाभ दिया जाए। वहीं एक और अतिथि शिक्षक रामकुमार यादव ने कहा है कि सत्र 2025-26 के अप्रैल तक का अनुभव प्रमाणपत्र दिया जाए, नहीं तो हम मेरिट में पीछे रहेंगे।