शा.हमीदिया कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल की बिल्डिंग
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राजस्थान के झालावाड़ में 1 दिन पहले सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई है। राजधानी भोपाल में भी कई सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग के जर्जर हो चुकी हैं। स्कूलों में टपकते पानी के बीच बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें स्कूल में पढ़ाया जा रहा है। अमर उजाला की टीम ने राजधानी की दो बड़े स्कूलों का जायजा लिया जहां स्थिति बहुत ही खराब है। जहां शा.हमीदिया कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल की बिल्डिंग 200 साल पुरानी है। वहीं शा. कन्या सुल्तानिया उमावि स्कूल की बिल्डिंग भी बहुत पुरानी है और स्थिति काफी खराब है। यहां की एक क्लास में पानी टप रहा था और वहीं बच्चों की जान जोखिम में डालकर वहां उन्हें बैठाया गया था। दोनों ही स्कूलों के अधिकारियों का कहना है कि हमने कई बार पत्र लिखकर बिल्डिंग सुधारने का आग्रह किया है। जबकि भोपाल जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शहर की 7 हाई सेकेंडरी स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर हो गई है। जिसके लिए हमने बजट मांगा है, जल्दी इन्हें सुधरा जाएगा।
गिर रहा छतों का प्लास्टर
शा. कन्या सुल्तानिया उमावि स्कूल की इमारत पूरी तरह जर्जर हालत में है, छत से पानी रिस रहा है। पिलर टूट चुके हैं। दीवारों में बड़ी दरारें हैं। बिजली के खुले तारों से करंट का खतरा है। शौचालय गंदगी और टूट-फूट की हालत में हैं। कई कमरों की छतों का प्लास्टर भी गिर रहा है। यहां के अधिकारियों का कहना है कि हमने सरकार को इसे लेकर कई बार लिखा है।
नहीं मिल रहा बजट
शा.हमीदिया कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल यह सदर मंजिल के भवन में संचालित हो रहा है। महल की दीवार बाहर की तरफ झुक गई है, जो कभी भी ढह सकती है। यहां कमरों की छत से पानी टपकता है। स्कूल की प्राचार्य विमला शाह, ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा है। उन्होने बताया कि यह भवन 200 साल पूराना है। ऊपर सीट लगीं है इस लिए बारिश में पानी में टपकता है। बजट हमेशा कम मिलाता है इसलिए पूरा काम नहीं हो पाता है। उन्होने बताया कि हमने एक बार 30 लाख मांगा था जिसमें केवल 2 लाख मिले थे।
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हाल की घटना ने बढ़ाई चिंता
हालही में भोपाल के एक अन्य सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना ने सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया था। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब राजस्थान की घटना ने बच्चों को अंदर डर भर दिया है। भोपाअल की स्कूल में मौजूद बच्चों ने बताया कि उन्हें यहां बठ कर पढ़ने में डर लगता है।
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दीवारों को ठोंक-ठोंक कर देख रहे स्कूल
जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने बताया कि जिन स्कूलों से शिकायत आ रही है वहां की दीवारों को ठोंक-ठोंक कर देख रहें हैं। जहां पानी आता है वहां बच्चों को नहीं बैठाने के निर्देश सभी स्कूलों को दिए गए हैं। मै खुद निरीक्षण कर रहा हूं। जिले के सभी स्कूलों से मरम्मत के लिए प्रस्ताव मंगाए गए हैं। अभी तक सात स्कूलों को प्रस्ताव मिले हैं, उन्हें विभाग को भेज दिया गया है। स्वीकृत होते ही स्कूलों को राशि दी जाएगी।