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Bhopal: बंद हो जाएंगे भोपाल के सभी एटीएम, UPI के चलन से स्थिति काफी खराब, बैंको को खर्च उठाना हो रहा मुश्किल

सार

भोपाल में यूपीआई का उपयोग बढ़ने से जगह-जगह खुले एटीएम बंद होने की कगार पर आ गए हैं। बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार एटीएम से ट्रांजैक्शन इतना कम हो गया है कि उसका खर्च तक उठाना मुश्किल हो रहा है। राजधानी में करीब 993 एटीएम है।
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एटीएम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल में यूपीआई का उपयोग बढ़ने के बाद जगह-जगह खुले एटीएम बंद होने की कगार पर आ गए हैं। बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार एटीएम से ट्रांजैक्शन इतना कम हो गया है कि उसका खर्च तक उठाना मुश्किल हो रहा है। दरअसल सभी सरकारी बैंक एटीएम का संचालन निजी कंपनी को किराया देकर संचालित करवाते हैं। और प्रत्येक एटीएम का हर महीने दो से ढाई लाख रुपए महीने का खर्च आता है। इसके लिए कम से कम 100 ट्रांजैक्शन होना जरूरी है। 400 ट्रांजैक्शन अगर प्रतिदिन होते हैं तो एटीएम फायदे में रहता है नहीं तो घाटे में चला जाता है। इस समय स्थिति यह है कि ज्यादातर एटीएम दिन में 10-20 ट्रांजैक्शन भी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बैंक एटीएम को बंद करने या शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। राजधानी में करीब 993 एटीएम है।
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ग्रामीण एरिया में भी स्थिति खराब 
बैंक ऑफ इंडिया से मिली जानकारी के अनुसार राजधानी भोपाल के शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी एटीएम का उपयोग ना के बराबर रह गया है। इसका मुख्य कारण यूपीआई का उपयोग होना बताया जा रहा है। बैंक ऑफ़ इंडिया के आलोक चक्रवर्ती ने बताया कि एटीएम को बंद करने और जहां उपयोगिता थोड़ा बहुत है वहां शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिस तरह से एटीएम की उपयोगिता समाप्त हो रही है आने वाले समय में शहर के ज्यादातर एटीएम बंद हो जाएंगे। केवल बैंकों के एटीएम चालु रहेंगे जिसमें पैसे जमा करने और निकालने की सुविधा मिलेगी।

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1987 में शुरू हुआ था देश का पहला एटीएम
जानकारी के लिए बता दें कि 27 जून 1967 को उतरी लंदन के इनफिल्ड कस्बे में पहला एटीएम शुरू हुआ था। एटीएम नाम से चर्चित ऑटोमेटेड टेलर मशीन है। भारत में 1987 में देश का पहला एटीएम शुरू हुआ था। इसे मुंबई में एचएसबीसी बैंक की शाखा ने लगाया था। तब से लेकर अबतक लाखों एटीमएम मशीन दुनिया भर में लग चुकी हैं। 
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जॉन शेफर्ड-बैरोन ने बनाया पहला एटीएम
एटीएम मशीन का विकास श्रेय जॉन शेफर्ड-बैरोन और उनकी इंजीनियरिंग टीम ने किया था। एक ब्रिटिश प्रिंटिंग कंपनी डे लारू के लिए काम करते हुए शेफर्ड और उनकी टीम ने डे ला रू ऑटोमेटेड कैश सिस्टम मशीन तैयार की थी। उन्हें इस मशीन को विकसित करने का आईडिया चॉकलेट वेंडिंग मशीन से आया था। जॉन शेफर्ड बैरोन का जन्म 23 जून 1925 को भारत के शिलॉन्ग में हुआ था और उनकी मृत्यू 2010 में स्कॉटलैंड में हुई।
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