राजधानी की निशातपुरा थाना पुलिस ने अवैध गतिविधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए डेयरी की आड़ में गोकशी के काले कारोबार में शामिल फरार आरोपी को धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी लम्बू उर्फ नफीस (44) पिछले 48 दिनों से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस उपायुक्त जोन-4 की ओर से तीन हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया गया था।
पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी को सात दुकान कलारी के पास घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। यह मामला 17 जुलाई 2026 को सामने आया था। शिकायतकर्ता लखन यादव की सूचना पर निशातपुरा पुलिस और स्थानीय नागरिकों ने करोंद क्षेत्र स्थित एक डेयरी परिसर में दबिश दी थी। डेयरी की आड़ में चलाए जा रहे इस कथित अवैध गोकशी के ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से एक सीएनजी ऑटो बरामद किया था, जिसके अंदर से मृत गाय का शव मिला था। इस घटना के बाद क्षेत्र में काफी आक्रोश फैल गया था, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले में पहले ही हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
घटना वाले दिन ही पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी अजीज और उसके बेटे आसिफ को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश तेज की गई। जांच के दौरान सिलसिलेवार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस प्रकरण में शामिल अजीज खान, आसिफ, अनीस, जुबेर और इकराम कुरैशी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
48 दिन तक ठिकाने बदलता रहा
मुख्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद आरोपी लम्बू उर्फ नफीस लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था। 3 सितंबर को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी सात दुकान कलारी के आसपास देखा गया है। निशातपुरा पुलिस की विशेष टीम ने इलाके की घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुराने आपराधिक मामले में भी दर्ज है नाम
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी लम्बू न केवल गोकशी के इस मामले में संलिप्त था, बल्कि उसके खिलाफ पहले से भी आपराधिक मामला दर्ज है। उसके खिलाफ राजधानी के हनुमानगंज थाने में मारपीट और अड़बाजी का मामला दर्ज बताया गया है।
गिरोह के संपर्क और लेनदेन की भी होगी जांच
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के अन्य संभावित संपर्कों और वित्तीय लेनदेन के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा कथित अवैध गतिविधियों का नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था।