राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में प्रश्नपत्र चोरी मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में करीब पांच घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान परिषद ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। लगातार चले आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए परीक्षा नियंत्रक को उनके सभी दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया। साथ ही परीक्षा कार्य से जुड़े संविदा संकाय सदस्यों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया गया।
सिर्फ हटाना काफी नहीं, दोषियों को निलंबित करें
अभाविप ने कहा कि प्रश्नपत्र चोरी केवल आपराधिक घटना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला है। परिषद का कहना है कि जिन अधिकारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए, ताकि पुलिस और अन्य एजेंसियां निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कर सकें। परिषद ने प्रशासन के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्र आंदोलन की पहली सफलता बताया, लेकिन साफ किया कि केवल दायित्वों से मुक्त करना पर्याप्त नहीं है। पूरे मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होना जरूरी है।
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लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़
अभाविप ने कहा कि आरजीपीवी प्रदेश का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय है, जहां लाखों विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा है। ऐसे मामलों से तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। परिषद ने चेतावनी दी कि दोषियों को संरक्षण देने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभाविप भोपाल महानगर मंत्री आरती ठाकुर ने कहा कि प्रश्नपत्र चोरी जैसी घटना लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि परीक्षा नियंत्रक को हटाना पहला कदम है, लेकिन जब तक दोषी अधिकारियों का निलंबन, निष्पक्ष जांच और कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक अभाविप का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।