मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लेकर राम मंदिर निर्माण तक के मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को भोपाल में चुनाव आयोग और भाजपा नेताओं को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे ईसीआई-नेट सॉफ्टवेयर की वजह से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित हुई। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए। दिग्विजय सिंह ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और निर्वाचन आयोग के समक्ष 23 मांगें रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का काम निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। उनके आरोप के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के कारण निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के अधिकार प्रभावित हुए और कुछ मामलों में उनके फैसलों को लागू करने में तकनीकी अड़चनें आईं। दिग्विजय सिंह ने सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके जरिए लिए जा रहे फैसलों की जांच की मांग की। मतदाता सूची से नाम हटने का आंकड़ा और सॉफ्टवेयर को लेकर लगाए गए आरोप उनके दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
एक आवेदन में कई नामों पर आपत्ति का मुद्दा उठाया
दिग्विजय सिंह ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दाखिल किए गए आवेदनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में एक व्यक्ति की ओर से 25 से 50 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए, जबकि उनके मुताबिक एक व्यक्ति को अधिकतम 10 नामों के संबंध में ही आवेदन देने की अनुमति है। उन्होंने ऐसे मामलों की जांच कराने की मांग की। गोवा के कुछ मतदाताओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नाम दोबारा जोड़ने के निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को पोर्टल पर जरूरी बदलाव करने में परेशानी आई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सक्षम अधिकारी किसी मतदाता के पक्ष में निर्णय लेते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था में उसे लागू करने में बाधा क्यों आनी चाहिए।
फॉर्म-6 में जोड़ी गई घोषणा पर कानूनी सवाल
मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलाव भी दिग्विजय सिंह के निशाने पर रहा। उन्होंने कहा कि आवेदन में ऐसी घोषणा जोड़ी गई, जिसमें व्यक्ति से उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज होने की जानकारी मांगी गई। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, इस अतिरिक्त जानकारी के बिना ऑनलाइन आवेदन जमा नहीं किया जा सकता था। उन्होंने इसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में चुनौती दी और मांग की कि फॉर्म में बदलाव के आधार, संबंधित मंजूरी तथा ईसीआई-नेट और ईआरओ-नेट के तकनीकी रिकॉर्ड की जांच हो। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदाता बनने की पात्रता निर्धारित है और निर्वाचन आयोग को भी कानून के अनुसार ही काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, याचिका में 23 मांगें रखी गई हैं और गृह मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में राम मंदिर का मुद्दा भी उठेगा
दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर से शुरू होने वाली अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की तैयारियों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि विजयादशमी के दिन उज्जैन में चिंतामण गणेश और महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद यात्रा शुरू करने की योजना है। यात्रा के दौरान शिवलिंग निर्माण, पूजन-अभिषेक, कन्या भोज, भंडारा और प्रसादी के कार्यक्रम रखे जाएंगे। आयोजन के दौरान प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा के पर्चे में राम जन्मभूमि का संक्षिप्त इतिहास और राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख किया जाएगा। दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे, चांदी और जमीन की खरीद से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।यात्रा के लिए थीम सॉन्ग भी तैयार किया गया है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शुभ संदेश भी उन्हें मिले हैं।
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सम्राट चौधरी के बयान पर जताई आपत्ति
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राम मंदिर से जुड़े बयान पर भी दिग्विजय सिंह ने नाराजगी जताई। सम्राट चौधरी ने कहा था कि भगवान श्रीराम करीब 400 साल तक तंबू में रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मंदिर बनवाकर उन्हें घर दिया।
दिग्विजय सिंह ने इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी को माफी मांगनी चाहिए या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका इस्तीफा लेना चाहिए। इस तरह उन्होंने अपनी प्रस्तावित यात्रा के जरिए धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों के साथ मंदिर निर्माण से जुड़े आरोपों को भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने के संकेत दिए।