टेलीग्राम पर पर दर्जन ग्रुप बनाकर करते थे ठगी
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया और एआईजी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि जालसाज सोशल साइट टेलीग्राम एप पर एक दर्जन से अधिक ग्रुप बनाकर अलग-अलग कंपनियों में पैसा निवेश करने का झांसा देते थे। झांसे में आए लोगों को टेलीग्राम एप पर ही कंपनी का लिंक भेज देते थे। इसके बाद अन्य जानकारी भेजी जाती थी। रजिस्ट्रेशन के नाम पर आरोपी महज 10 से 18 हजार रुपये प्राप्त कर लेते थे। निवेश कराने के बाद कुछ दिन लोगों को रिटर्न देकर भरोसा जीता जाता था। कुछ समय तक लोगों को रिटर्न दिया जाता था। इसके बाद लिंक को निष्क्रिय कर दिया जाता था। लक्षित ग्राहकों को अलग लिंक देकर लाखों रुपये का निवेश कराया जाता था।
जालसाज ऑनलाइन ठगी की रकम को विदेशों में ट्रांसफर कर दिया करते थे। अब तक की जांच में पुलिस को आरोपियों के खाते से 2283 करोड़ रुपये के लेन-देन हिसाब मिल चुके हैं। इसी के साथ 90 करोड़ रुपये एसटीएफ ने सीज कराए हैं, जिन्हें आरोपी विदेशी खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी में थे। दावा किया जा रहा है कि आरोपियों से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द गिरफ्तार कर एक और बड़ा खुलासा किया जाएगा। फिलहाल दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
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इस तरह जालसाजों को पुलिस ने दबोचा
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि इंदौर निवासी ईशान सलूजा ने एसटीएफ में यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल कंपनी में निवेश और फिक्स मुनाफा देने का लालच देकर 20 लाख से अधिक की राशि निवेश कराई थी। ठगी करने वाले उन्हें टेलीग्राम नाम के एप पर मिले थे। लिंक देकर रजिस्ट्रेशन के नाम पर 18 हजार रुपये लिए। बाद में दिल्ली के रहने वाले 46 वर्षीय दीपक शर्मा और 51 वर्षीय मदन मोहन कुमार ने हवाई जहाज से इंदौर आए और चेक के माध्यम से रकम ली। रकम को कैश कराने के बाद किसी प्रकार का रिटर्न नहीं दिया। बाद में मुनाफा देने से भी इन्कार कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि दीपक शर्मा बीए पास है वह एक शोरूम में जॉब करता है, जबकि किसी को पता नहीं चला कि वह ठगी करता है। इसी तरह मदन मोहन भी बीकॉम पास है और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है। वह भी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है।
इन राज्यों में हजारों लोगों से ठगी
आरोपियों ने पूछताछ में एसटीएफ को बताया कि वे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और असम के हजारों लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी की है। ठगी की रकम को राय डेंट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, किन डेंट बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सहित 16 अलग-अलग करंट अकाउंट में बुलाई जाती थी।
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इस तरह राशि को भेजते थे विदेश
ठगी की राशि जालसाज बोटब्रो नाम से बैंक खातों में प्राप्त करते थे। इसके बाद मेटा-5 अकाउंट के डॉलर में इस राशि को दिखाया जाता था। बाद में मुद्रा विनिमय कर विदेशी मुद्रा बाजार में ट्रेडिंग की जाती थी। इस तरह के अन्य राज्यों में मिलाकर 16 प्रकरण देशभर में दर्ज हैं।
इंदौर और भोपाल के कई जालसाज फरार
ईडी भी इस संबंध में पड़ताल कर रही है। जालसाजों के सरगना दुबई में बैठकर पूरा गिरोह संचालित करते हैं। इंदौर और भोपाल सहित अन्य शहरों में इस गिरोह से जुड़े कई जालसाज और फरार बताए जा रहे हैं।